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धारा 370 और 35A सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी तथ्य

धारा 370 और 35A सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी तथ्य

धारा 370 : महत्त्वपूर्ण तथ्य

भारतीय संविधान की आर्टिकल / धारा -370 के तहत जम्मू - कश्मीर राज्य को भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार दिया गया था , जिसे संविधान के भाग -21 के तहत दर्ज किया गया था ।

धारा -370 को भारतीय संविधान में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और जम्मू कश्मीर के महराजा हरी सिंह के मध्य हुए समझौते के बाद जोड़ा गया था ।

धारा -370 को 26 जनवरी , 1957 को लागू किया गया था ।

धारा -370 के मुताबिक भारतीय संविधान जम्मू - कश्मीर के मामले में सिर्फ तीन क्षेत्रों - रक्षा , विदेश मामले और संचार के लिए कानून बना सकती थी । इसके अलावा किसी कानून को लागू करने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी चाहिए थी ।

आर्टिकल -370 में मौजूद प्रावधान निम्नलिखित थे -

जम्मू - कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता ( जम्मू - कश्मीर और भारत ) होती थी ।

जम्मू - कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता था ।

जम्मू - कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता था । जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है ।

जम्मू - कश्मीर के अन्दर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं होता था ।

भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश जम्मू - कश्मीर के अंदर मान्य नहीं थे ।

भारत की संसद जम्मू - कश्मीर के सम्बंध में अत्यंत सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती थी ।

जम्मू - कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जाती थी । इसके विपरीत यदि वह पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर लें तो उसे भी जम्मू - कश्मीर की नागरिकता मिलती थी ।

धारा -370 की वजह से कश्मीर RTI तथा RTE लागू नहीं थे । CAG लागू नहीं था ।

कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू होता था ।

कश्मीर में पंचायत के अधिकार नहीं थे ।

कश्मीर में चपरासी को 2500 ही मिलते थे ।

कश्मीर में अल्पसंख्याकों ( हिन्दू - सिख ) को 16 % आरक्षण नहीं मिलता था ।

धारा -370 की वजह से कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते थे ।

धारा -370 की वजह से ही पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरीकता मिल जाता था । इसके लिए पाकिस्तानियों को केवल किसी कश्मीरी लड़की से शादी करनी होती थी ।

आर्टिकल 35A

आर्टिकल 35A संविधान में शामिल प्रावधान था जो जम्मू और कश्मीर विधानमंडल को यह अधिकार प्रदान करता था कि वह यह तय करें कि जम्मू और कश्मीर का स्थायी निवासी कौन है और किसे सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में विशेष आरक्षण दिया जायेगा , किसे संपत्ति खरीदने का अधिकार होगा , किसे जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव में वोट डालने का अधिकार होगा , छात्रवृत्ति तथा अन्य सार्वजनिक सहायता और किसे सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का लाभ मिलेगा ।

आर्टिकल 35A को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ . राजेन्द्र प्रसाद द्वारा एक आदेश पारित करके 14 मई , 1954 को भारत के संविधान में जोड़ा था ।

स्थायी निवासी / नागरिक वह व्यक्ति है जो 14 मई , 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या फिर उससे पहले के 10 सालों से राज्य में रह रहा हो , और उसने वहाँ संपति हासिल की हो ।

धारा -370 तथा 35A खत्म : परीक्षोपयोगी तथ्य

11 अगस्त , 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द द्वारा ‘ जम्मू - कश्मीर पुनर्गठन विधेयक -2019 ’ को मंजूरी मिलने के बाद सरकार ने जम्मू - कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त कर धारा 370 और 35A को हटा दिया है ।

जम्मू - कश्मीर से धारा -370 हटने के बाद भी धारा -370 के तीन खंडों में से खण्ड -1 अभी भी लागू है ।

धारा -370 हटाने के लिए ‘ जम्मू - कश्मीर पुनर्गठन विधेयक -2019 ’ को सर्वप्रथम गृहमंत्री अमित शाह ने 5 अगस्त , 2019 को राज्य सभा में पेश किया गया , जहाँ विधेयक के पक्ष में 125 तथा विपक्ष में 61 वोट पड़े । जबकि लोकसभा में 6 अगस्त , 2019 को पेश किया गया जहाँ विधेयक के पक्ष में 370 तथा विपक्ष में 70 वोट पड़े ।

अब जम्मू - कश्मीर राज्य दो केन्द्रशासित प्रदेश जम्मू - कश्मीर एवं लद्दाख के रूप में 31 अक्टूबर 2019 से अस्तित्व में है ।

भारत में अब 28 राज्य तथा 9 केन्द्रशासित प्रदेश हो गये है ।

वर्तमान में केन्द्रशासित प्रदेश जम्मू - कश्मीर में 22 जिले है ।

केन्द्रशासित प्रदेश लद्दाख में 2 जिले ( लेह , कारगिल ) होंगे ।

अब जम्मू - कश्मीर के विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष का होगा ।

अब भारत का नागरिक जम्मू - कश्मीर में जमीन खरीद सकेगा ।

अब केन्द्रशासित प्रदेश जम्मू - कश्मीर में उपराज्यपाल तथा लद्दाख में राज्यपाल का शासन होगा ।

धारा -370 हटने के समय जम्मू - कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक थे ।

अब जम्मू - कश्मीर में अनु . - 356 , अनु . - 360 तथा RTI लागू होंगे ।

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