20 Facts About Iodised Salt (आयोडीन नमक से संबंधित 20 तथ्य )

20 प्रश्न आयोडीन की कमी से होने वाले दोषों के बारे में :

  1. आयोडीन क्या है ?
  2. आयोडीन युक्त नमक क्या है ?
  3. आयोडीन जरूरी क्यों है ?
  4. आमतौर पर व्यक्ति को कितनी आयोडीन चाहिए ?
  5. हमें आयोडीन कहां से मिलती है ?
  6. पर्याप्त मात्रा में आयोडीन न मिलने पर क्या होता है ?
  7. घेंघा वास्तव में क्या है ?
  8. आयोडीन की कमी के कारण कौन-कौन सी शिकायतें हो सकती है ?
  9. बच्चा क्रेटिन क्यों हो जाता है ?
  10. भारत में आयोडीन की कमी से प्रभावित क्षेत्र कौन से हैं ?
  11. क्या हर रोज आयोडीन नमक खाने से घेंघा , ❝ क्रेटनिज्म ❞ और आयोडीन की कमी से जुड़ी अन्य शिकायतें दूर हो सकती है ?
  12. खाने की ऐसी कौन सी चीजें है जिनमें सबसे अधिक आयोडीन होता है ?
  13. आयोडीन नमक में क्यों मिलाया जाता है ? क्या उसे दवाई की तरह अलग से नहीं खाया जा सकता ?
  14. अगर हम आयोडीन की कमी वाले क्षेत्र में नहीं रहते हैं , तो क्या नमक में अतिरिक्त आयोडीन खाना नुकसानदेह नहीं होगा ?
  15. क्या गर्भवती स्त्रियां ,छोटे बच्चे ,बीमार आयोडीन मिला नमक खा सकते हैं ? क्या यह सामान्य नमक जैसा ही होता है ?
  16. मुझे कैसे पता चलेगा कि नमक में आयोडीन है ?
  17. क्या आयोडीन युक्त नमक जानवरों को दिया जा सकता है ?
  18. क्या आयोडीन युक्त नमक को सामान्य नमक की तरह स्टोर किया जा सकता है ?
  19. यदि हमें अपने स्थानीय बाजार में आयोडीन युक्त नमक ना मिले तो हमें क्या करना चाहिए ?
  20. आयोडीन युक्त नमक कब तक खाते रहना होगा ?

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20 Facts About Iodised Salt

आयोडीन क्या है ?

आयोडीन एक प्राकृतिक तत्व है । जो हमारे शरीर के लिए जरूरी है ।हमारे शरीर के कुछ महत्वपूर्ण क्रियाएं आयोडीन पर निर्भर हैं ।

आयोडीन युक्त नमक क्या है ?

आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल आयोडीन की कमी को रोकने के लिए किया जाता है । यह सामान्य नमक ही होता है इसमें बहुत थोड़ी सी आयोडीन मिला दी जाती है ।आयोडीन युक्त नमक ऊपर से सामान्य नमक जैसा ही होता है ।उसे सामान्य नमक की तरह ही प्रयोग किया जाता है । उसके स्वाद और रूप - रंग में कोई अंतर नहीं होता है ।

आयोडीन जरूरी क्यों है ?

आयोडीन शरीर व मस्तिष्क दोनों की सही वृद्धि ,विकास व संचालन के लिए आवश्यक है । आयोडीन की कमी से घेंघा हो सकता है । घेंघा होने पर शरीर में चुस्ती - स्फूर्ति नहीं रहती। सुस्ती व थकावट महसूस होती है ।सामान्य व्यक्ति के मुकाबले उसमें काम करने की ताकत भी कम हो जाती है ।

और तो और ,आयोडीन की कमी से नवजात शिशु के शरीर व दिमाग की बढ़ोतरी व विकास में हमेशा के लिए रुकावट आ सकती है । छोटे बच्चों ,नौजवानों ,गर्भवती महिलाओं के लिए आयोडीन बहुत जरूरी है । गर्भवती माँ में आयोडीन की कमी हो तो उसका बच्चा असामान्य हो सकता है ।अगर तुरंत बच्चे का इलाज नहीं कराया गया तो उसकी मानसिक व शारीरिक हालत और भी खराब होती जाएगी ।

आमतौर पर व्यक्ति को कितनी आयोडीन चाहिए ?

हर रोज औसतन 150 माइक्रोग्राम यानी कि सुई की नोक के बराबर । इसका मतलब क्या हुआ कि आपको जीवन भर के लिए एक छोटे से चम्मच से भी कम आयोडीन चाहिए। शरीर को हर रोज नियमित रूप से आयोडीन मिलनी जरूरी है । इसलिए यह जरूरी है कि हर व्यक्ति के लिए आयोडीन नमक रोज की खुराक का हिस्सा हो ।

हमें आयोडीन कहां से मिलती है ?

आयोडीन मूल रूप से मिट्टी और पानी में होती है । इसलिए हमारी यह जरूरत आयोडीन युक्त जमीन पर उगे अनाज से पूरी होती है। जिस जमीन में आयोडीन नहीं होती वहाँ उगे अनाज में भी इस जरूरी तत्व का अभाव होगा । अतः जो लोग आयोडीन रहित जमीन वाले इलाकों में रहते हैं और वहां उपजा अनाज व साग - सब्जियां खाते हैं ,उनमें आयोडीन की कमी हो जाती है।

पर्याप्त मात्रा में आयोडीन न मिलने पर क्या होता है ?

आयोडीन की कमी से सिर्फ घेंघा ही नहीं होता , बल्कि शरीर व दिमाग में और भी कई खराबियां में पैदा हो सकती है । जिनमें से कुछ मामूली होती है ,तो कुछ खतरनाक । आयोडीन की कमी से सबसे जाना - माना लक्षण है घेंघा । इसमें गलग्रंथि (थायराइड ग्लैंड) बढ़ जाती है । इसमें मामूली सी सूजन से लेकर बड़ी गिल्टी तक बन जाती है ।

घेंघा वास्तव में क्या है ?

घेंघा गले की वह सूजन है जो गल ग्रंथि बढ़ने से होती है । अगर शरीर को पर्याप्त मात्रा में आयोडीन नहीं मिलती तो गल ग्रंथि बढ़ जाती है ।यह जरूरी नहीं कि घेंघा ऊपर से दिखाई ही दे ।कभी-कभी , खासतौर से शुरू में सिर्फ अनुभवी डॉक्टर द्वारा ही इसका पता चल सकता है । पर बढ़ने पर यह दूर से ही दिख जाता है और किसी के लिए भी यह जान पाना मुश्किल नहीं होता की घेंघा है । घेंघा से ग्रस्त व्यक्ति को आयोडीन की कमी की वजह से और भी कई शिकायतें हो सकती है जो ऊपर से दिखाई नहीं पड़ती ।

आयोडीन की कमी के कारण कौन-कौन सी शिकायतें हो सकती है ?

आयोडीन की कमी के कारण कई शिकायतें हो सकती है : घेंघा , मानसिक विकृति , बहरा - गूंगापन , भेंगापन ठीक से खड़े होने या चलने में कठिनाई और शारीरिक विकास में रुकावट । गर्भवती स्त्री के शरीर में आयोडीन की कमी होने पर गर्भपात का खतरा रहता है । बच्चा मरा हुआ पैदा हो सकता है या फिर वह शारीरिक व मानसिक रूप से विकृत या बोना हो सकता है । आयोडीन की मामूली सी कमी से ये सब संभव है । घेंघा इसमें सबसे खतरनाक है ।

बच्चा क्रेटिन क्यों हो जाता है ?

बच्चे को मां के पेट में मानसिक व शारीरिक वृद्धि व विकास के लिए आयोडीन चाहिए । और यह सिर्फ उसे मां से मिल सकती है । अगर मां में इसकी कमी होगी तो बच्चे को वह तत्व नहीं मिल पाएगा । मां के शरीर में आयोडीन की बहुत अधिक कमी होने पर बच्चे का शारीरिक व मानसिक विकास हमेशा के लिए रुक जाता है । वह क्रेटिन हो जाता है । उसे ठीक तरह से चलने - फिरने , बोलने या सोचने में भी कठिनाई होती है । मां के शरीर में आयोडीन की मामूली सी कमी का भी बच्चे पर बुरा असर पड़ता है हालांकि हो सकता है कि वह ऊपर से सामान्य दिखाई देता हो । उसके दिमाग पर इसका क्या असर पड़ा है -यह उस समय पता चलता है जब वह स्कूल में सामान्य बच्चों की बराबरी नहीं कर पाता । हमारे देश में ऐसे बच्चों की कमी नहीं है । इसका क्षेत्र की सामाजिक व आर्थिक प्रगति पर बुरा असर पड़ता है ।

भारत में आयोडीन की कमी से प्रभावित क्षेत्र कौन से हैं ?

आयोडीन की सबसे अधिक कमी हिमालय के तराई में बसे नगरों व गांवों में है ।उत्तर में जम्मू और कश्मीर से लेकर उत्तर पूर्व तक 2500 वर्ग किलोमीटर का समूचा इलाका इस कमी का शिकार है । लेकिन महाराष्ट्र ,गुजरात ,मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश ,ओड़िशा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु ,गोवा ,राजस्थान ,पश्चिम बंगाल और यहां तक कि दिल्ली से भी इस कमी के समाचार मिले हैं । देखा जाए तो भारत का कोई भी राज्य ऐसा नहीं है जहां आयोडीन की कमी नहीं है । हर रोज इस कमी से ग्रस्त नहीं इलाके का पता चल रहा है ।

क्या हर रोज आयोडीन नमक खाने से घेंघा , ❝ क्रेटनिज्म ❞ और आयोडीन की कमी से जुड़ी अन्य शिकायतें दूर हो सकती है ?

क्रेटनिज्म का कोई इलाज नहीं है । आयोडीन की वजह से होने वाली अन्य शिकायतों की तरह इस तरह (कुछ तरह के गोयटर को छोड़कर) इसका भी इलाज संभव नहीं है हालाँकि कि इसे आसानी से रोका जरूर जा सकता है । हर रोज आयोडीन युक्त नमक के इस्तेमाल से वर्तमान और आगे की पीढ़ियों में इस कमी के दुष्परिणामों से बचाया जा सकता है ।

क्रेटनिज्म (अल्पबुद्धिता) क्या है ?

गर्भ / भ्रूण या नवजात शिशु में आयोडीन की कमी का परिणाम परिणाम है । क्रेटिन्स में गंभीर , अपरिवर्तनीय मानसिक मंदता पाई जाती है । साथ ही उनमें गूंगा - बहरापन , बौना कद और हड्डियों के ढांचे का अधूरा विकास जैसे अन्य लक्षण भी पाए जा सकते हैं । कुछ क्रेटिन्स में घेंघा और अधिक बढ़ी हुई थायराइड ग्रंथि पाई जाती है ,जबकि अन्य क्रेटिन्स में ऐसा नहीं होता ।

खाने की ऐसी कौन सी चीजें है जिनमें सबसे अधिक आयोडीन होता है ?

कुछेक समुद्री वनस्पतियों को छोड़कर ऐसी कोई खाने की चीज नहीं है जो स्वयं आयोडीन से भरपूर हो । अन्न या साग - सब्जियों में आयोडीन मिट्टी से आती है । अगर मिट्टी में आयोडीन की कमी है तो वहाँ उगी साग - सब्जियों या अनाज में भी उसकी कमी होगी । इसलिए उन क्षेत्रों में इस कमी को सिर्फ आयोडीन युक्त नमक से पूरा किया जा सकता है ।

आयोडीन नमक में क्यों मिलाया जाता है ? क्या उसे दवाई की तरह अलग से नहीं खाया जा सकता ?

आयोडीन के बारे में एक महत्वपूर्ण बात है कि हालाँकि यह बहुत कम मात्रा में जरूरी है , इसे हर रोज लेना आवश्यक है । दवाई या विटामिन की गोली की तरह यह हर रोज ली जा सकती है , पर फिर एक गोली जिंदगी भर लेनी होगी । नमक एक ऐसी चीज है जो हर कोई हर रोज खाता है । हम सब तकरीबन 10 से 15 ग्राम नमक प्रतिदिन खाते हैं । अगर इसमें आयोडीन मिला दी जाती है तो सही मात्रा में आयोडीन हमारे शरीर में पहुंच जाती है ।

अगर हम आयोडीन की कमी वाले क्षेत्र में नहीं रहते हैं , तो क्या नमक में अतिरिक्त आयोडीन खाना नुकसानदेह नहीं होगा ?

नहीं , यह नुकसानदेह नहीं होगा । हमारे शरीर को आयोडीन की एक निश्चित मात्रा की जरूरत होती है । अगर उतनी आयोडीन मिल रही है तो शरीर अतिरिक्त मात्रा को ग्रहण नहीं करेगा । और वह मूत्र के साथ बाहर निकल जाएगी । दूसरी ओर अगर आप में आयोडीन की कमी है तो आपकी गल ग्रंथि जरूरत के मुताबिक आयोडीन का इस्तेमाल कर शेष को अस्वीकार कर देगी । इसलिए आयोडीन नमक किसी के लिए भी नुकसानदेह नहीं है । याद रखिए आयोडीन एक आवश्यक पोषक तत्व है , कोई दवा नहीं ।

क्या गर्भवती स्त्रियां ,छोटे बच्चे ,बीमार आयोडीन मिला नमक खा सकते हैं ? क्या यह सामान्य नमक जैसा ही होता है ?

हाँ , आयोडीन हर इंसान को हर रोज चाहिए , चाहे छोटा हो , बड़ा हो , बीमार हो या भला चंगा हो । गर्भवती औरतों और छोटे बच्चों को तो इसकी और भी अधिक जरूरत है । इसलिए हर रोज आयोडीन युक्त नमक खाना सिर्फ ठीक ही नहीं बल्कि जरूरी भी है ।

मुझे कैसे पता चलेगा कि नमक में आयोडीन है ?

अधिकतर राज्यों में आयोडीन रहित नमक की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है - असम ,अरुणाचल प्रदेश ,उत्तर प्रदेश ,दादरा और नगर हवेली ,दिल्ली ,पंजाब ,बिहार, चंडीगढ़ ,नागालैंड, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम ,मेघालय, जम्मू और कश्मीर, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम ,त्रिपुरा ,पश्चिम बंगाल ,दमन और दीव, और लक्षदीप । कुछ राज्यों के कुछ भागों में आयोडीन -रहित नमक की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है - आंध्र प्रदेश, उड़ीसा ,कर्नाटक ,गुजरात और महाराष्ट्र । एक कम दाम वाला टेस्टिंग किट ( परीक्षण किट) भी उपलब्ध है । इसकी सहायता से आप आसानी से नमक में आयोडीन की मात्रा का पता लगा सकते हैं

क्या आयोडीन युक्त नमक जानवरों को दिया जा सकता है ?

जी हां , आयोडीन युक्त नमक जानवरों के लिए अच्छा है । इसका असर उनकी सेहत और उत्पादकता पर भी पड़ता है । अगर हम जानवरों को आयोडीन युक्त नमक खिलाते हैं तो मरे हुए बच्चे पैदा होने और गर्भस्त्राव की संभावना कम हो जाती है । इसके अलावा जिन पशुओं को आयोडीन युक्त नमक दिया जाता है उनका दूध भी आयोडीन से भरपूर होता है ।

क्या आयोडीन युक्त नमक को सामान्य नमक की तरह स्टोर किया जा सकता है ?

आयोडीन युक्त नमक को स्टोर करने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी होगी । अगर आप आयोडीन युक्त नमक को काफी देर तक धूप या सीलन में पड़ा रहने देते हैं तो इसमें मिली आयोडीन खत्म हो सकती है । इसके लिए आप इसे प्लास्टिक, लकड़ी या मिट्टी या शीशे के ढक्कनदार बर्तन में ठीक से बंद करके रखें । ध्यान रहे उतना ही नमक खरीदें जितना आप जल्द से जल्द खा सकते हैं । अधिक समय के लिए उसे स्टोर ना करें ।

यदि हमें अपने स्थानीय बाजार में आयोडीन युक्त नमक ना मिले तो हमें क्या करना चाहिए ?

भारत सरकार का निश्चय है कि समूचे देश में आयोडीन युक्त नमक का प्राप्त हो । अगर आपकी मार्केट में यह नमक नहीं है तो आप अपने राज्य के यूनियन टेरिटरी के सिविल सप्लाई डिपार्टमेंट या पास के नमक आयुक्त कार्यालय को लिखें , या आई.डी .डी. सेल , डायरेक्टरेट जनरल आफ हेल्थ सर्विसेज ,भारत सरकार को लिखें ।

आयोडीन युक्त नमक कब तक खाते रहना होगा ?

पर्यावरण के प्रदूषण से स्थिति दिन प्रति दिन बिगड़ती जा रही है। बड़े पैमाने पर जंगल काट देने से ऊपरी मिट्टी पानी से बहती जा रही है । जिसके कारण आयोडीन का अभाव बढ़ता जा रहा है ।

आयोडीन पानी में घुलनशील तत्व है और यह मिट्टी के ऊपरी सतह पर ही पाया जाता है । पर्यावरण के विभिन्न प्रभावों के कारण भूमि में आयोडीन की कमी हो जाती है । जिसके फलस्वरूप वहाँ उगने वाले सभी पौधों , कृषि , वनस्पति में आयोडीन का अभाव हो रहा है । उन पदार्थों को प्रयोग में लाने वाले सभी व्यक्ति आयोडीन की कमी से होने वाले अन्य प्रकार के दुष्प्रभावों से प्रभावित हो सकते हैं । इन परिस्थितियों को सामने रखते हुए यह स्पष्ट हो जाता है कि इनकी रोकथाम के लिए ( सबसे सस्ता आसान तरीका ) आयोडीन युक्त नमक का उपयोग करना आवश्यक ही नहीं अनिवार्य हो जाता है । यही नहीं यूरोप और अमेरिका में कई देश 1920 से नमक में आयोडीन मिला रहे हैं । क्योंकि यही उस समस्या का सही हल है जो लाखों करोंड़ों लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है । हर रोज आप आयोडीन युक्त नमक खाकर आप अपने व अपने बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं और आयोडीन की कमी के दुष्परिणामों से बच सकते हैं । इससे आप बच्चों और बच्चों के बच्चों को स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क के साथ बढ सकने का सर्वोत्तम अवसर मिलता है और यह इसके लिए बहुत छोटी लागत है ।


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