सिंधु घाटी सभ्यता

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Sindhu Ghati Sabhyta
    उपक्रम -:
  1. हड़प्पा सभ्यता की सीमाएं
  2. नदियों के किनारे बसे हड़प्पा कालीन नगर
  3. हड़प्पा कालीन स्थल एवं खोजकर्ता (उत्खनन कर्ता )
  4. नगर विन्यास पद्धति
  5. वास्तु कला
  6. कृषि
  7. पशुपालन
  8. व्यापार एवं वाणिज्य
  9. धर्म
  10. अंत्येष्टि के प्रकार
  11. लिपि
  12. अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  13. हड़प्पा कालीन स्थल
  14. हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारण
  15. क्षेत्रफल की दृष्टि से हड़प्पा कालीन नगरों का क्रम
इस सभ्यता के प्रथम अभिशेष हड़प्पा नामक स्थल से प्राप्त हुए थे ।
कार्बन डेटिंग पद्धति द्वारा हड़प्पा सभ्यता की तिथि 2500 ई.पू. से 1750 ई.पू. माना गया है ।
हड़प्पा सभ्यता को भारतीय उपमहाद्वीप की प्रथम नगरीय क्रांति माना जाता है ।
भारतीय पुरातत्व विभाग के जन्मदाता अलेक्जेंडर कनिंघम को मानते हैं ।
भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना का श्रेय वायसराय लॉर्ड कर्जन को प्राप्त है ।
हड़प्पा सभ्यता कांस्य युगीन सभ्यता है ।

हड़प्पा सभ्यता की सीमाएं

उत्तर में - मांडा (जम्मू कश्मीर)
पश्चिम में - सुत्कांगेन्डोर (ब्लूचिस्तान )
पूर्व में - आलमगीरपुर(मेरठ )
दक्षिण में - दैमाबाद (महाराष्ट्र )

नदियों के किनारे बसे हड़प्पा कालीन नगर

  1. हड़प्पा - रावी नदी
  2. मोहनजोदड़ो - सिंधु नदी
  3. लोथल - भोगवा नदी
  4. कालीबंगा - घग्गर नदी
  5. रोपड़ - सतलज नदी
  6. आलमगीरपुर - हिंडन नदी
  7. सुत्कांगेन्डोर - दाश्क नदी
  8. कुणाल - सरस्वती नदी
  9. बनवाली - सरस्वती नदी
  10. चन्हूदड़ों - सिंधु नदी

हड़प्पा कालीन स्थल एवं खोजकर्ता (उत्खनन कर्ता )

  1. मोहनजोदड़ो - राखल दास बनर्जी एवं मार्टिमर व्हीलर
  2. हड़प्पा - दयाराम साहनी, माधव स्वरूप वत्स एवं व्हीलर
  3. चन्हूदड़ों - गोपाल मजूमदार एवं अर्नेस्ट मैके
  4. लोथल - रंगनाथ राव
  5. कालीबंगा - अमलानंद घोष एवं बृजवासी लाल
  6. बनवाली - रवींद्र सिंह बिष्ट
  7. रोपड़ - यज्ञदत्त शर्मा
  8. सुत्कांगेन्डोर -सर मार्क आरेल स्टाइन

नगर विन्यास पद्धति

यह जाल पद्धति (Grid System ) पर आधारित है ।
नगर में आयताकार या वर्गाकार चौड़ी गलियां होती थी जो एक दूसरे को समकोण पर काटती थी ।

वास्तु कला

भारत में वास्तु कला का आरम्भ सिंधुवासियों ने किया था ।
सिंधु सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी ।
सड़कें एक- दूसरे को समकोण पर काटती थी ।
भवन में दो मंजिलें भी थी ।
दरबाजे सड़कों की ओर खुलते थे ।
मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी इमारत अन्नागार है ।
फर्श कच्चा होता था केवल कालीबंगा में पक्के फर्श के साक्ष्य मिले हैं ।

कृषि

विश्व में कपास का उत्पादन सर्वप्रथम सिंधुवासियों ने किया ।
सिन्धुवासी चावल (साक्ष्य -लोथल से) ,बाजरा (साक्ष्य -लोथल व सौराष्ट्र ),रागी सरसों ( साक्ष्य -कालीबंगा) का उत्पादन करते थे ।
सिंधुवासी हल (साक्ष्य -बनवाली ) से परिचित थे ।
कालीबंगा से जुते हुए खेत के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं ।
गन्ना का कोई साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है ।

पशुपालन

सिन्धुवासी हाथी व घोड़े से परिचित थे , किंतु उन्हें पालतू बनाने में असफल रहे घोड़े का साक्ष्य सुरकोटदा (अस्थि पंजर प्राप्त) से प्राप्त हुआ है ।
सिंधुवासियों को गैंडा ,बंदर ,भालू ,खरहा आदि जंगली जानवरों का ज्ञान था ।
शेर का कोई साक्ष्य नहीं मिला है ।

व्यापार एवं वाणिज्य

सिंधु सभ्यता में मुद्रा का प्रचलन नहीं था । क्रय - विक्रय वस्तु विनिमय पर आधारित था ।
सिंधु सभ्यता के लोग अन्य सभ्यता के लोगों के साथ व्यापार करते थे
प्रमुख आयतित वस्तुएं - :
  1. टिन - अफगानिस्तान ,ईरान
  2. तांबा - खेतड़ी (राजस्थान)
  3. चांदी - अफगानिस्तान,ईरान
  4. सोना - अफगानिस्तान व दक्षिण भारत
  5. सीसा - ईरान ,अफ़गानिस्तान एवं राजस्थान
  6. लाजवर्द - मेसोपोटामिया एवं अफगानिस्तान
संभवत हड़प्पा सभ्यता में शिल्पियों एवं व्यापारियों का शासन था ।

धर्म

हड़प्पा सभ्यता से मंदिर का कोई अवशेष प्राप्त नहीं हुआ है ।
मोहनजोदड़ो की एक मोहर से स्वास्तिक चिन्ह प्राप्त हुआ है ।
हड़प्पा सभ्यता में मुख्य रूप से कूबड़ वाले सांड की पूजा होती थी ।
हड़प्पा सभ्यता में वृक्ष पूजा के साक्ष्य मिले हैं , पीपल एवं बबूल की पूजा होती थी ।
सिंधु सभ्यता में प्रेतवाद भक्ति और पुनर्जन्मवाद के बीज मिलते हैं ।

अंत्येष्टि के प्रकार

हड़प्पा सभ्यता में अंत्येष्टि तीन प्रकार से होती थी ।
1.पूर्ण समाधिकरण
2.आंशिक समाधिकरण
3.दाह संस्कार
लोथल से युग्म शावाधन का साक्ष्य मिला है ।
नोट-विज्ञान इसको सती प्रथा के रूप में देखते हैं ।
रोपड़ से मालिक के साथ कुत्ता दफनाए जाने के साक्ष्य मिले हैं ।

लिपि

सिंधु लिपि के बारे में सर्वप्रथम विचार करने वाले प्रथम व्यक्ति अलेक्जेंडर कनिंघम थे ।
सिंधु लिपि को पढ़ने के सर्वप्रथम प्रयास एल. ए. वेंडल किया था ।
सिंधु लिपि भाव चित्रात्मक थी ।
सिंधु लिपि के चित्रों में मछली, चिड़िया ,मानव आकृति आदि चिन्ह मिलते हैं ।
सिंधु लिपि दाएं से बाएं लिखी जाती थी ।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

सिंधु सभ्यता को प्राक् इतिहासिक युग में रखा जा सकता है ।
सिंधु सभ्यता के मुख्य निवासी द्रविड़ और भूमध्य सागरीय थे ।
सिंधु सभ्यता के सर्वाधिक स्थल गुजरात में खोजे गए हैं ।
लोथल एवं सूरकोटदा सिन्धु सभ्यता के बंदरगाह थे ।
मनके बनाने का कारखाना लोथल एवं चन्हूदड़ों से प्राप्त हुआ है ।
सिंधु सभ्यता की मुख्य फसलें गेहूं एवं जौ थी ।
तौल की इकाई 16 के अनुपात में थी ।
सिंधु सभ्यता के लोग धरती की पूजा उर्वरता की देवी के रूप में करते थे ।
सिंधु सभ्यता में मातृदेवी की पूजा की जाती थी ।
सिंधु सभ्यता मातृ सत्तात्मक थी ।
पर्दा प्रथा एवं वेश्यावृत्ति सिंधु सभ्यता में प्रचलित थी ।

हड़प्पा कालीन स्थल

  1. हड़प्पा
  2. हड़प्पा रावी नदी के किनारे, 1921 में दयाराम साहनी द्वारा खोज ।
    शंख का बना हुआ बैल नटराज की आकृति वाली मूर्ति प्राप्त ।
    पैर में सांप दबाए गरुड़ का चित्र ,मछुआरे का चित्र प्राप्त ।
    सिर के बल खड़ी नग्न स्त्री का चित्र जिसके गर्भ से पौधा निकला दिखाई दे रहा है प्राप्त ।
  3. मोहनजोदड़ो
  4. सिंधु नदी किनारे ,1922 में राखल दास बनर्जी द्वारा खोज ।
    भवन पक्की ईटों द्वारा निर्मित सीढ़ी का साक्ष्य मिला।
    प्रवेश द्वार गली में ।
    कांसे के एक नर्तकी की मूर्ति प्राप्त ।
    एक श्रृंगी पशु आकृति वाली मुहर प्राप्त ।
    इसे मौत का टीला भी कहा जाता है ।
  5. लोथल
  6. भोगवा नदी के किनारे गुजरात में स्थित ।
    चावल एवं बाजरा के साक्ष्य प्राप्त ।
    दो मुंह वाले राक्षस के अंकन वाली मुद्रा प्राप्त ।
    पंचतंत्र की चालाक लोमड़ी का अंकन प्राप्त।
    मम्मी का उदाहरण प्राप्त ।
    बत्तख, बारहसिंघा, गोरिल्ला के अंकन वाली मुद्रा प्राप्त ।
  7. कालीबंगा
  8. घग्गर नदी के किनारे राजस्थान में स्थित ।
    इसका शाब्दिक अर्थ काली चूड़ियां है ।
    प्राक् हड़प्पा एवं विकसित हड़प्पा दोनों के साक्ष्य प्राप्त।
    जुते हुए खेत एवं सरसों के साक्ष्य प्राप्त।
    एक सींग वाले देवता के साक्ष्य प्राप्त ।
    कपाल में छेद वाले बालक का शब्द प्राप्त (शल्य क्रिया का उदाहरण)।
  9. चन्हूदड़ों
  10. मनके बनाने का कारखाना प्राप्त।
    ईंट पर बिल्ली का पीछा करते हुए कुत्ते के पदचिन्ह प्राप्त ।
  11. बनवाली
  12. हरियाणा के हिसार जिले में स्थित ।
    अच्छे किस्म की जौ की प्राप्ति ।
    हल की आकृति वाला खिलौना प्राप्त ।
  13. रोपड़
  14. पंजाब में सतलुज नदी के किनारे स्थित ।
    मानव के साथ कुत्ते के दफनाए जाने के साक्ष्य प्राप्त ।
  15. धौलावीरा
  16. गुजरात के भरूच में स्थित ।
    जल प्रबंधन के लिए 16 जलाशयों की प्राप्ति ।
  17. सुरकोटदा
  18. गुजरात के कच्छ में स्थित ।
    घोड़े की अस्थियाँ प्राप्त ।

हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारण

  • पारिस्थितिक असंतुलन
  • जल प्लावन
  • शुष्कता (घग्गर का सूखना)
  • बाहरी आक्रमण
  • नदी मार्ग में परिवर्तन
  • प्रशासनिक असफलता
  • बाढ़ का आना
  • जलवायु में परिवर्तन

  • क्षेत्रफल की दृष्टि से हड़प्पा कालीन नगरों का क्रम

    मोहनजोदड़ो ( सबसे बड़ा) > धौलावीरा > कालीबंगा
    नोट - धौलावीरा भारत में स्थित सबसे बड़ा हड़प्पा कालीन स्थल है ।

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