ऊष्मा एवं ऊष्मागतिकी : भौतिक विज्ञान ( रेलवे एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए)

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ऊष्मा ( Heat )

ऊष्मा ऊर्जा का वह रूप है जिससे हमें वस्तु की गर्माहट का अहसास होता है । यह वस्तु के पदार्थ के अणुओं की गतिज ऊर्जा के कारण होती है । किसी वस्तु में निहित ऊष्मा उस वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर करती है । इसका मात्रक कैलोरी , किलोकैलोरी अथवा जूल है ।

कैलोरी ( Calorie ): एक ग्राम जल का ताप 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को कैलोरी कहा जाता है ।

किलोकैलोरी ( Kilocalorie ): यह ऊष्मा की वह मात्रा है जो एक किग्रा जल का ताप 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक होती है ।
1 कैलोरी = 4.18 जूल

ब्रिटिश थर्मल यूनिट ( B.Th.w . ) : एक पौण्ड जल का ताप 1°F बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को 1 B.Th.U कहा जाता है ।
1 B.Th.U . = 252 कैलोरी
1 कैलोरी = 4.186 जूल
1 किलो कैलोरी = 4186 जूल = 1000 कैलोरी

ताप ( Temperature )

किसी वस्तु की गर्माहट को उस वस्तु का ताप कहते हैं । जब दो वस्तुएँ सम्पर्क में स्थित होती हैं , तो ऊष्मा का प्रवाह सदैव ऊँची ताप वाली वस्तु से नीचे ताप वाली वस्तु में होता है ।

ताप मापने के लिए , जो उपकरण प्रयुक्त होता है , उसे तापमापी कहा जाता है ।

ताप के पैमाने ( Scales of Temperature Measurement )

सेल्सियस पैमाना : इस पैमाने में हिमांक का 0°C तथा भाप बिन्दु को 100°C अंकित किया जाता है तथा इनके बीच की दूरी को 100 बराबर भागों में बांट दिया जाता है । प्रत्येक भाग का 1°C कहा जाता है । इस पैमाने का आविष्कार स्वीडन के वैज्ञानिक ए. सेल्सियस ने 1710 में किया था ।

फारेनहाइट पैमाना ( Fahrenheit Seale ) : इसमें जल के हिमांक को 32°F तथा क्वथनांक को 212°F माना गया । इसका आविष्कार फारेनहाइट नामक वैज्ञानिक ने वर्ष 1717 में किया था ।

रयूमर पैमाना : इसका हिमांक 0°R तथा भाप बिन्दु 80°R होता है । इनके बीच का भाग 80 बराबर भागों में बांट दिया जाता है । इसका आविष्कार रयूमर ने 1930 में किया था ।
निम्न समीकरण द्वारा एक पैमाने पर मापे गए ताप को दूसरे पैमाने के ताप में परिवर्तित कर सकते हैं -

C / 5
=
F - 32 / 9
=
R / 4
=
K / 5

केल्विन पैमाना : इसका हिमांक 273K तथा भाप बिन्दु 373 K रखा गया है । इनके बीच की दूरी को 100 बराबर भागों में बांटा जाता है ।

डॉक्टरी थार्मामीटर 96°F से 110°F तक के ताप को मापता है । मानव शरीर का ताप 37°C या 98.4°F होता है ।

विशिष्ट ऊष्मा ( SpecificHeat )

किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान का ताप 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को उस पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा कहते हैं । इसे प्राय : Q के द्वारा व्यक्त किया जाता है ।

विशिष्ट ऊष्मा का मात्रक कैलोरी / ग्राम / °C या किलोकैलोरी / किग्रा / °C अथवा जूल / किग्रा / °C होता है ।
सोने ( Gold ) की विशिष्ट ऊष्मा = 130 जूल / किग्रा / °C
पानी की विशिष्ट ऊष्मा = 4180 जूल / किग्रा / °C

ऊष्मा इंजन ( Heat Engine ): वह युक्ति जिसके द्वारा ऊष्मा का यांत्रिक कार्य में रूपांतरण किया जा सकता है , ऊष्मा ईंजन कहलाती है ।

ऊष्मा इंजन की तापीय दक्षता ( Thermal Efficiency of Heat Engine ): किसी ऊष्मा इंजन की तापीय दक्षता को निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता है -

तापीय दक्षता =
प्रति चक्र किया गया कुल कार्य / प्रति चक्र प्राप्त की गई कुल ऊर्जा

किसी ऊष्मा इंजन की तापीय क्षमता 100 % से हमेशा कम रहती है , अत : तापीय दक्षता सदैव 1 से कम ही रहती है ।

परम शून्य ( Absolute zero ) : सिद्धान्तः अधिकतम तापमान की कोई सीमा नहीं है , किन्तु किसी वस्तु का निम्नतम तापमान -273.15°C से कम नहीं हो सकता । इसे परम शून्य ताप कहा जाता है ।

केल्विन पैमाने पर इसे ‘ OK ’ लिखा जाता है । केल्विन में दर्शाए गए ताप में डिग्री ( ° ) नहीं लिखा जाता है ।

ऊष्मा एवं ऊष्मागतिकी : भौतिक विज्ञान

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