राजस्थान : खनिज एवं उद्योग ( Rajasthan : Mining and Industry )

Rajasthan : Mining and Industry In Hindi

खनिज ( Mineral )

खनिज वे प्राकृतिक संसाधन हैं जो भगर्भ से खोदकर निकाले जाते हैं । खनिज अजैव प्रक्रियाओं से निर्मित रासायनिक यौगिक होते हैं ।

प्रकृति में हमें खनिज अन्य तत्त्वों व अवयवों के साथ मिश्रित रूप में मिलते हैं ऐसे मिश्रणों को अयस्क कहते हैं ।

खनिज दो प्रकार के होते हैं - धात्विक तथा अधात्विक खनिज । जिन खनिजों से ऊर्जा मिलती है , उन्हें ऊर्जा खनिज कहते हैं ।

राजस्थान खनिजों की दृष्टि से एक सम्पन्न राज्य है । देश के कुल खनिज उत्पादन में राजस्थान का योगदान 22 प्रतिशत है ।

खनिज भंडारों की दृष्टि से झारखंड के बाद राजस्थान का दूसरा स्थान है ।

कुछ खनिजों के उत्पादन में राजस्थान का एकाधिकार है । राजस्थान में खनिजों का वितरण छितरा हुआ है ।

राजस्थान में खनिजों का वितरण ( Distribution of Mineral in Rajasthan )

राजस्थान में धात्विक व अधात्विक खनिजों के भंडार अलग - अलग क्षेत्रों में मिलते हैं ।

राजस्थान में ताँबा , सीसा - जस्ता , टंगस्टन , चांदी आदि धात्विक खनिज पाये जाते हैं ।

ताँबा उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान का देश में दूसरा स्थान है । सीसा - जस्ता के उत्पादन में राजस्थान का एकाधिकार है ।

राजस्थान में देश का 75 प्रतिशत टंगस्टन तथा 80.8 प्रतिशत चांदी के सुरक्षित भण्डार हैं ।

राजस्थान में संगमरमर , जिप्सम आदि अधात्विक खनिज के रूप में तथा पेट्रोलियम ऊर्जा खनिज के रूप में पाया जाता है ।

संगमरमर के उत्पादन में राजस्थान को एकाधिकार प्राप्त है । यहाँ मकराना का संगमरमर विश्व प्रसिद्ध है ।

भारत में सर्वाधिक जिप्सम भी राजस्थान में मिलता है । इसके जमाव गोठ - मांगलोद . चरू - बीकानेर क्षेत्र व जैसलमेर बाड़मेर क्षेत्रों में मिलते हैं ।

राजस्थान में खनिज तेल के उत्पादन में वृद्धि की पर्याप्त सम्भावनाएँ हैं । यहाँ बीकानेर जैसलमेर व पश्चिमी जोधपुर में खाना तेल मिलता है ।

उद्योग ( Industry )

राजस्थान में उद्योगों के विकास के लिए 2015 में ‘ विशेष आर्थिक क्षेत्र विधेयक ’ पारित किया गया है तथा राज्य सरकार ' मेक इन राजस्थान ' का नारा दिया है ।

राजस्थान में औद्योगिक विकास हेतु 36 जिला उद्योग केन्द्र व 734 केन्द्र कार्यरत हैं ।

सूती वस्त्र उद्योग ( Cotton Textile Industry )

सूती वस्त्र उद्योग राजस्थान का परम्परागत व प्राचीनतम उद्योग है । यह ग्रामीण जनसंख्या को सर्वाधिक रोजगार प्रदान वाला उद्योग है ।

राजस्थान की सबसे बड़ी सूती मिल महाराजा उम्मेद सिह मिल है , जबकि प्रथम सूती वस्त्र मिल कृष्णा मिल्स व्यावर है

राजस्थान में भीलवाड़ा को वस्त्र उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान का मैनचेस्टर व वस्त्र नगरी कहा जाने लगा है |

वर्तमान में राजस्थान की अधिकांश सूती मिलें राजस्थान राज्य प्रौद्योगिक विकास व विनियोग निगम लिमिटेड का सहायता से शुरू की गयी हैं ।

राजस्थान में सूती वस्त्र उद्योग को कच्चे माल की आपूर्ति , शुष्क जलवायु , ऊर्जा की कमी , पूँजी की कमी , अप्रशिक्षित श्रमिकों आदि समस्याओं से जुझना पड़ रहा है ।

सीमेन्ट उद्योग ( Cement Industry )

राजस्थान का सीमेण्ट उत्पादन में देश में आन्ध्रप्रदेश के बाद दूसरा स्थान है ।

सीमेन्ट उद्योग के स्थानीयकरण की दृष्टि से राजस्थान में सर्वाधिक अनुकूल स्थिति चित्तौड़गढ़ व सवाई माधोपुर जिलों की है ।

राजस्थान में सबसे पहले सीमेन्ट कारखाने की शुरूआत लाखेरी ( बूंदी ) में हुई थी ।

राज्य में बड़े व मध्यम सीमेण्ट कारखानों की तुलना में छोटे कारखाने अधिक स्थापित किये जा रहे हैं ।

राजस्थान में ग्रामीण विकास ( Rural Development in Rajasthan )

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में राज्य की 75.2 प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में निवास करती है ।

राजस्थान में ग्रामीण विकास के लिए अलग से ग्रामीण विकास मन्त्रालय बनाया गया है ।

गरीबी उन्मूलन , आर्थिक एवं ढाँचागत विकास , आय के असमान वितरण को दूर करने व रोजगार का सृजन करने के लिए ग्राम विकास की अनेक योजनाएँ बनायी गई हैं ।

वर्तमान में ग्रामीण विकास विभाग का नाम ग्रामीण विकास व पंचायती राज विभाग है ।

डेयरी उद्योग ( Dairy Industry )

राजस्थान में डेयरी विकास कार्यक्रम को प्रोत्साहित करने के लिए 1973 में डेयरी विभाग की स्थापना की गयी है । वर्तमान में इसके लिए राजस्थान को - आपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड की स्थापना की गयी ।

राजस्थान में डेयरी विकास कार्यक्रम सहकारी समीतियों के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है ।

सन 1970 में देश के अन्य राज्यों के साथ राजस्थान में ' आपरेशन फ्लड ' शुरू किया गया ।

राजस्थान सहकारी क्रय - विक्रय संघ ( राजफैड ) द्वारा पशुओं हेतु उत्तम आहार उपलब्ध कराया जाता है ।

राजस्थान राज्य दुग्ध निगम ग्रामीण , जिला व राज्य स्तर पर पशु सम्वर्द्धन तथा दुग्ध उत्पादन के सम्पूर्ण कार्यक्रम के निष्पादन के लिए जिम्मेदार है ।

राजस्थान राज्य दुग्ध सहकारी संघ समन्वय एवं परस्पर सहयोग का राज्य स्तरीय शीर्ष संगठन हैं ।

कुटीर उद्योग ( Cottage Industry )

कुटीर उद्योग वे उद्योग हैं जिनका एक परिवार के सदस्यों द्वारा पूर्ण रूप से अथवा आंशिक रूप से संचालन किया जाता है ।

कच्चे माल के उपयोग की दृष्टि से कुटीर उद्योग कृषि आधारित उद्योग होते हैं । खनिजों पर आधारित उद्योग , पशु सम्पदा पर आधारित उद्योग तथा वनोपज पर आधारित उद्योग ।

इन प्रमुख उद्योगों के अलावा कृषि , वस्त्र , काष्ठ , धातु , मिट्टी , चर्म व लाख आदि के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योग का संचालन किया जा सकता है ।

राजस्थान राज्य में संचालित कुटीर उद्योगों में तेल एवं वनस्पति ही उद्योग , बंधाई , छपाई व रंगाई उद्योग , खादी उद्योग , चमडा उद्योग , ऊनी वस्त्र उद्योग , दुग्ध उद्योग , हड्डी पाउडर उद्योग , वनोपज पर आधारित उद्योग , खनिजों पर आधारित उद्योग , हथकरघा उद्योग तथा कृत्रिम रेशम उद्योग आदि सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं ।

राज्य सरकार अपने बजट में कुटीर उद्योगों के विकास के लिए विशेष क्लस्टर्स बनाकर इनको बढ़ावा दे रही है ।

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