महात्मा गाँधी - विचारधारा, जीवन घटनाक्रम

Mahatma Gandhi PDF Notes For IAS

भारतीय राष्ट्रीय क्षितिज पर महात्मा गांधी का आगमन वीसवीं सदी के दूसरे दशक के अन्त में हुआ

वे 1841 ई . में वकालत पास करके इंग्लैण्ड से भारत लौटे और अभिभाषक के रूप में स्थापित होने की कोशिश की

उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में ही ' नेटाल भारतीय कांग्रेस की स्थापना की

उनके द्वारा चलाए गए अफ्रीका संघर्ष के दूसरे चरण की शुरूआत 1906 ई . से हुई .

मूल गांधीवादी प्रणाली की शुरूआत 1906 ई . से हुई

गांधीजी के द्वारा 1916 ई . में अहमदाबाद में साबरमती आश्रम की स्थापना की गई .

अहमदाबाद के मिल मजदूरों ने 1918 ई . में गांधीजी के नेतृत्व में हड़ताल की .

अहमदाबाद के मिल मजदूरों की हड़ताल के तहत गांधीजी ने प्रथम बार भूख हड़ताल का सहारा लिया .

अंग्रेज सरकार ने 21 मार्च , 1919 ई . को रॉलेट एक्ट पास किया , जिसे भारतीय इतिहास में काले कानून की संज्ञा से परिभाषित किया गया .

काले कानून के विरोध में मदनमोहन मालवीय , मजरूल हक और जिन्ना ने व्यवस्थापिका से इस्तीफा दे दिया .

जनरल डायर 11 अप्रैल , 1919 ई . को अमृतसर पहुँचा और वहाँ फौजी शासन की शुरूआत की .

पुलिस ज्यादती और निर्वासन के विरोध में 13 अप्रैल की संध्या को अमृतसर के जलियांवाले बाग में एक आम सभा का आयोजन किया गया , जिसमें करीब 20 हजार लोगों ने भाग लिया .

जलियांवाले बाग हत्याकांड में करीब एक हजार लोग मारे गए तथा अनेकों घायल हो गए .

खिलाफत आंदोलन का एकमात्र उद्देश्य खलीफा की सर्वोच्चता और उसकी शक्ति को स्थापित करना था .

गांधीजी ने 1 अगस्त , 1920 ई.से असहयोग आंदोलन करने का निर्णय लिया .

असहयोग आंदोलन की शुरुआत में गांधीजी ने अंग्रेजी सरकार के विरोधस्वरूप अपनी सरकारी उपाधि ‘ कैसर ए - हिंद ’ को वापस कर दिया .

1921 ई . में युवराज प्रिंस ऑफ वेल्स का बम्बई आगमन हुआ

5 फरवरी , 1922 ई . को गोरखपुर में चौरा - चौरी घटना हुई .

कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में जवाहर लाल नेहरू ने भारत की पूर्ण स्वतंत्रता की मांग रखी .

7 अगस्त , 1942 ई . को बम्बई में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ , जिसमें अगस्त प्रस्ताव पेश किया गया .

1853 ई . में श्रमिक वर्ग की स्थापना की गई .

1942 ई.से लेकर 1945 ई . तक का काल भारतीय राजनीति के लिए निष्क्रिय काल माना जाता है .

सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी , 1897 ई . में उड़ीसा के कटक में हुआ .

गांधीजी अफ्रीका में 22 वर्ष तक प्रयास करने के बाद 46 वर्ष की उम्र में भारत लौटे .

गांधीजी के दक्षिणी अफ्रीका के संघर्ष की कहानी का प्रथम दौर 1894 से 1906 ई . तक चला .

गांधीजी ने ‘ इंडियन ओपीनियन ’ नामक अखबार का प्रकाशन शुरू किया .

दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी ने फार्म और फिनिक्स सेटमेंट की स्थापना करके कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को अहिंसक सत्याग्रह का प्रशिक्षण दिया .

रॉलेक्ट एक्ट के विरोध में भारतीय नेताओं ने एक नारा दिया- “ कोई वकील नहीं , कोई दलील नहीं , कोई अपील नहीं ” .

जनरल डायर के आदेश के कारण जलियाँवाला वाग हत्याकांड हुआ . इसके एवज में उसके इस कार्य के इनाम स्वरूप जनरल डायर को सरकार की ओर से 20,000 की थैली भेंट की गई थी

प्रथम विश्व युद्ध में विजयी होने के बाद ब्रिटेन का ऑटोमन साम्राज्य और तुर्की के खलीफा के प्रति रुख बदल गया .

1919 ई . में दिल्ली में हुए खिलाफत आंदोलन के गांधीजी अध्यक्ष चुने गए .

गांधीजी के द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन के दो पक्ष थे -1 . रचनात्मक तथा 2. विध्वंसात्मक .

31 दिसम्बर , 1929 ई . की मध्य रात्रि को रावी नदी पर तिरंगा फहराया गया .

12 मार्च , 1930 ई . को अपने 79 समर्थकों को साथ लेकर गांधीजी ने दांडी के लिए प्रस्थान किया .

5 अप्रैल , 1929 ई . को दांडी पहुँचकर गांधीजी ने समुद्र के पानी से नमक बनाया .

7 अगस्त , 1942 ई . में बम्बई में कांग्रेस के अधिवेशन में यह घोषणा की गई- “ भारतीय कौम चुपचाप देखती नहीं रह सकती , जब उसकी तकदीर का फैसला होने जा रहा है . अंग्रेज चाहे तो हिंदुस्तान छोड़कर जा सकते हैं , लेकिन हिंदुस्तानी इसे नहीं छोड़ सकते , क्योंकि यह उनका घर है ” .

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जयप्रकाश नारायण ने ‘ आजाद दस्ता ’ की स्थापना की .

“भारत छोड़ो ” के जवाब में मुस्लिम लीग ने नारा दिया “ बांटो और भागो ”

मई , 1934 ई . में पटना में जयप्रकाश नारायण ने अखिल भारतीय समाजवादी सम्मेलन की स्थापना की , भारतीय क्रांतिकारी एम . एन . राय ने 17 अक्टूबर , 1920 ई . में ताशकंद में हिंदुस्तान की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की गई .

सुभाष चन्द्र बोस के विचार नेहरू तथा गांधी से नहीं मिलते थे . अतः उन्होंने ‘ इंडिपेंडेंट लीग ’ की स्थापना की .

इसके साथ ही सुभाष ने कांग्रेस के अन्दर ही ‘ फारवर्ड ब्लाक ’ का भी गठन किया .

1941 ई . में नजरबंद रहते हुए भी वे काबुल , मास्को के रास्ते बर्लिन पहुँचे .

जापान में रासबिहारी बोस द्वारा स्थापित भारतीय स्वतंत्रता लीग के अध्यक्ष बने और भारतीय राष्ट्रीय सेना का गठन किया .

उन्होंने सिंगापुर में 1943 ई . में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार बनाई .

18 अगस्त , 1945 ई . में एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई .


जीवन घटनाक्रम


2 अक्टूबर , 1869काठियावाड़ ( पोरबन्दर ) के वैश्य परिवार में करमचन्द गांधी उर्फ काबा गांधी की चौथी पत्नी पुतलीबाई से मोहनदास करमचन्द गांधी का जन्म .
1876माता - पिता के साथ राजकोट गए . वारह वर्ष की उम्र तक प्राथमिक स्कूल में शिक्षा प्राप्त की . एक व्यवसायी गोकुलदास माकनजी की पुत्री कस्तूरबा के साथ सगाई हुई .
1881राजकोट में उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश .
1883कस्तूरबा से विवाह .
1884-85मांसाहार का प्रारम्भ किया , लेकिन माता - पिता से विश्वासघात न करने के कारण एक वर्ष बाद परित्याग कर दिया . 63 वर्ष की उम्र में पिता का देहान्त .
1887मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की.भावनगर ( काठियावाड़ ) के एक महाविद्यालय में प्रवेश लिया . प्रथम सत्र की समाप्ति होने पर पढ़ाई छोड़ दी .
4 सितम्बर , 1888समुद्र के रास्ते से इंग्लैण्ड के लिए रवाना हुए .
28 अक्टूबर , 1888लन्दन पहुंचे . नृत्य और संगीत की शिक्षा लेना प्रारम्भ किया . शाकाहार भोजन पर रहे .
1889पहली बार गीता का अध्ययन किया.मितव्ययी जीवनचर्या का प्रारम्भ किया .
1890शाकाहारी क्लब चलाया .
जून 1890लन्दन की मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की .
सितम्बर 1890शाकाहारी सभा में शामिल हुए .
10 जून , 1891बैरिस्टर हुए
12 जून , 1891समुद्री मार्ग से भारत के लिए रवाना हुए .
जुलाई 1891बम्बई पहुँचे .
नवम्बर 1891बम्बई उच्च न्यायालय में प्रवेश के लिए आवेदन किया .
1892राजकोट और बम्बई में वकालत के लिए संघर्ष किया .राजकोट में विधिक ड्राफ्ट्स मेन बन गए .
अप्रैल 1893कानूनी काम से एक मुसलमान फर्म द्वारा नियुक्त किए जाने पर दक्षिण अफ्रीका के लिए प्रस्थान किया .
मई - जून 1893रंगभेद के कई अनुभव हुए . जातीय पूर्वाग्रहों के लिए संघर्ष करने का निश्चय किया .
22 अगस्त , 1894नेटाल भारतीय कांग्रेस की स्थापना की .
1 सितम्बर , 1894नेटाल के सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट के रूप में नाम रजिस्टर कराया . वहाँ पर नाम रजिस्टर कराने वाले पहले भारतीय वने . वाइबिल एवं कुरान का अध्ययन किया . लियो टॉल्सटाय की पुस्तक ' किंगडम ऑफ गॉड इज विदिन यू ' का अध्ययन किया .
1895दक्षिणी अफ्रीकी भारतीयों की समस्याओं के प्रति अधिक प्रतिबद्ध हुए . द इण्डियन फ्रैंचाइजा एन अपील टु एवरी ब्रिटन इन साउथ अफ्रीका जारी की .
जुलाई 1896भारत वापस आए तथा दक्षिणी अफ्रीकी भारतीयों की ओर से आन्दोलन प्रारम्भ किया
14 अगस्त , 1896राजकोट में ‘ द ग्रीन पैम्पलेट ’ प्रकाशित किया . दक्षिण अफ्रीका के भारतीयों की शिकायत के सम्बन्ध में भारतीयों को जानकारी देने के उद्देश्य से पूना , कलकत्ता , मद्रास एवं मुम्बई का दौरा किया .
30 नवम्बर , 1896पत्नी और बच्चों के साथ समुद्र के रास्ते से दक्षिण अफ्रीका के लिए रवाना हुए .
13 जनवरी , 1897डरवन उतरने पर , दक्षिण अफ्रीका में अनुवन्धित भारतीय मजदूरों की हालत पर भारत में उनके द्वारा दिए गए भाषणों की रिपोर्ट से उत्तेजित होकर भीड़ द्वारा उनका घेराव किया गया .
20 जनवरी , 1897आक्रमणकारियों पर मुकदमा चलाने से इन्कार किया .
6 अप्रैल , 1897इरवन में घटी घटनाओं एवं उसको पृष्ठ भूमि के सम्बन्ध में औपनिवेशिक राज्यमंत्री चैम्बर लेन को लम्बा अभ्यावेदन प्रस्तुत किया .
1898-99लोकेशनों और भारतीयों के व्यापार सम्बन्धी अधिकारों पर प्रतिवन्धों के विरुद्ध भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस औपनिवेशिक तथा साम्राज्यिक प्राधिकारियों के सामने अभ्यावेदन प्रस्तुत किया .
1899वोअर युद्ध में भारतीय एम्बुलैन्स कोर की स्थापना की . युद्ध पदक से सम्मानित .
1900दक्षिण अफ्रीका के भारतीयों की समस्या पर दादाभाई नौरोजी के संकल्प के प्रारूप को कांग्रेस अधिवेशन में भेजा .
18 अक्टूबर , 1901समुद्री मार्ग से भारत के लिए रवाना .
27 अक्टूबर , 1901कांग्रेस के समक्ष दक्षिण अफ्रीका के बारे में संकल्प प्रस्तुत किया .
28 जनवरी , 1902 रंगून गए .
1 फरवरी , 1902गोखले के साथ कलकत्ता में एक माह रहे . राजकोट वापिस आकर वकालत करने लगे .
जुलाई , 1902राजकोट से बम्बई आकर वकालत प्रारम्भ की .
नवम्बर , 1902ट्रांसवाल में एशिया - विरोधी कानून के विरुद्ध भारतीयों के मामले का नेतृत्व करने के लिए दक्षिण अफ्रीका आमंत्रित .
दिसम्बर , 1902डरवन पहुंचे . चैम्बर लेन से मिलने के लिए एक प्रतिनिधिमण्डल का नेतृत्व किया .
1903ट्रांसवाल के सुप्रीम कोर्ट में अटार्नी के रूप में नाम रजिस्टर कराया . ट्रांसवाल ब्रिटिश इण्डियन एसोसिएशन की स्थापना की .
जून , 1903‘ इण्डियन ओपिनियन ’ का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ .
1904जॉन रस्किन की पुस्तक ‘ अन टू द लास्ट ’ का अध्ययन किया . इरवन ( नेटाल ) के पास फिनीक्स आश्रम की स्थापना की . जोहान्सबर्ग में प्लेग फैलने पर अस्पताल की व्यवस्था की . गुजराती में आहार विज्ञान पर क्रमबद्ध लेख लिखे , कुछ समय बाद इनका अंग्रेजी में अनुवाद किया जो ' गाइड टू हैल्थ ' शीर्षक से प्रकाशित हुई .
1905बंगाल विभाजन का विरोध किया . विलापती वस्तुओं के बहिष्कार का समर्थन किया . ब्रिटिश उच्च आयुक्त लॉर्ड मेलबोर्न को ट्रान्सवाल के भारतीयों की समस्याओं से अवगत कराने के लिए प्रतिनिधिमण्डल का नेतृत्व किया .
12 मई , 1906भारत के लिए होमरूल का समर्थन किया .
जून - जुलाई , 1906जुलू विद्रोह में भारतीय स्ट्रेचर - वाहक कोर की स्थापना की . जीवन भर ब्रह्मचर्य का पालन करने की शपथ ली .
11 सितम्बर , 1906जोहान्सबर्ग में भारतीयों की विशाल सभा को सम्बोधित किया जिसमें ताजा जारी किए गए ट्रांसवाल एशियाई कानून संशोधन अध्यादेश के विरुद्ध निष्किय प्रतिरोध करने की शपथ ली गई .
जनवरी - फरवरी , 1907नैतिक धर्म पर गुजराती में आठ लेख लिखे , जो इण्डियन ओपिनियन में साप्ताहिक तथा एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुए .
मार्च , 1907ट्रांसवाल की पार्लियामेन्ट में एशियाई पंजीकरण अधिनियम पास हुआ . भारतीयों ने विरोध प्रकट करने के लिए सभाएं आयोजित की .
अप्रैल , 1907प्रिटोरिया में स्मट्स से मिले और उन्हें जनसभाओं में पास किए गए संकल्पों से अवगत कराया . इण्डियन ओपिनियन में ब्लैक - एक्ट का विरोध करने शपथ ली .
मई . 1907ब्लैक - एक्ट को ब्रिटिश सम्राट् की स्वीकृति प्राप्त हुई .
जुलाई , 1907ब्लैक - एक्ट का विरोध करते हुए जनसभा को सम्बोधित किया .
अगस्त , 1907पंजीकरण अधिनियम की आलोचना करते हुए स्मट्स को पत्र लिखा जिसमें कुष्ठ संशोधनों का सुझाव दिया .
दिसम्बर , 1907स्मट्स ने गांधीजी पर मुकदमा चलाने का निश्चय किया .
8 जनवरी , 1908सरकार से पंजीकरण अधिनियम को निलम्बित करने के लिए कहा . स्वैच्छिक पंजीकरण के लिए प्रस्ताव किया .
10 जनवरी , 1908निष्क्रिय प्रतिरोध के स्थान पर ' सत्याग्रह ' शब्द अपनाया.ट्रांसवाल छोड़ने में असफल होने के कारण दो माह के कारावास का दण्ड मिला .
30 जनवरी , 1908प्रिटोरिया में जनरल स्मट्स से मिलने के लिए बुलाया गया और समझौता होने पर कारावास से छोड़ दिया गया .
10 फरवरी , 1908समझौते के अन्तर्गत भारतीयों द्वारा स्वैच्छिक रूप से अपने अंगुलिछाप दिए जाने को अपने हितों के प्रति विश्वासघात मानते हुए पठानों द्वारा गांधीजी पर लगभग घातक आक्रमण . अपने आक्रमणकारियों पर मुकदमा चलाने से इनकार
मार्च - जून , 1908अधिनियम को रद्द करने के वचन को पूरा कराने के लिए स्मट्स से बातचीत . स्मट्स द्वारा वचन निभाने से इनकार
जुलाई , 1908स्मट्स के साथ किया गया पत्र - व्यवहार प्रकाशित . भारतीयों ने एक विशाल जनसभा में अंगुलिछाप देने से इनकार करने का निश्चय किया और पंजीकरण प्रमाण पत्र को जला दिया .
अगस्त , 1908भारत में ब्रिटिश राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए हिंसा के प्रयोग को व्यर्थ एवं हानिकारक बताया .स्मट्स से ब्लैक - एक्ट को रद्द करने की अपील की . पंजीकरण प्रमाण - पत्र को जलाया गया . पुनः निष्क्रिय प्रतिरोध का आरम्म .
1 सितम्बर , 1908संशोधित पंजीकरण अधिनियम को सम्राट् की स्वीकृति प्राप्त . स्मट्स ने समझौते के लिए भारतीय शर्तों को अस्वीकार किया .
15 अक्टूबर , 1908गांधीजी बन्दी बनाए गए एवं दो माह के कठोर कारावास की सजा दी गई .
12 दिसम्बर , 1908फोक्सरूस्ट जेल से रिहा . दक्षिण अफ्रीका में अंग्रेजों के भारतीयों के साथ कठोर अपमानजनक और निष्ठुर व्यवहार को ब्रिटिश साम्राज्य के लिए हानिकारक बताते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा दक्षिण अफ्रीका पर संकल्प पारित किया गया .
16 जनवरी , 1909पंजीकरण प्रमाण - पत्र न दिखा पाने के लिए फोक्सरूस्ट में गिरफ्तार हुए . देश निकाला दिया गया , वापिस आ गए और फिर से गिरफ्तार कर लिए गए , परन्तु जमानत पर छोड़ दिए गए .
20 जनवरी , 1909समाचार - पत्रों में लेख लिखकर भारतीयों से अन्तिम संघर्ष के लिए तैयार होने का आह्वान किया .
25 फरवरी , 1909फोक्सरूस्ट में गिरफ्तार , तीन महीने की सजा दी गई .
2 मई , 1909प्रिटोरिया केन्द्रीय जेल में स्थानान्तरण .
24 मई , 1909जेल से रिहा किए गए .
21 जून , 1909भारतीयों का मामला प्रस्तुत करने के लिए हाजी हबीब के साथ प्रतिनिधि के रूप में इंग्लैंड रवाना हुए .
10 जुलाई , 1909लन्दन पहुँचे . लॉर्ड एम्पर्थिन की सहायता से प्रभावशाली ब्रिटिश नेताओं और जनसमुदाय को भारत के मामले की सही जानकारी देने तथा साम्राज्यिक अधिकारियों के सामने अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए निरन्तर कार्य करते रहे .
1 अक्टूबर , 1909निष्क्रिय प्रतिरोध आन्दोलन के सम्बन्ध में टॉल्सटॉय को पत्र लिखा .
9 नवम्बर , 1909‘ द टाईम्स ’ द्वारा ट्रांसवाल कानूनों पर गांधीजी और सरकार के बीच समझौता वार्ता असफल हो जाने का समाचार प्रकाशित .
10 नवम्बर , 1909टॉल्सटाय के पत्र का उत्तर दिया . अपनी जीवनी डोर्क के हाथों भेजी .
13 नवम्बर , 1909इंग्लैण्ड से दक्षिण अफ्रीका के लिए प्रस्थान . एस . एस . किण्डोनन कासल पर ‘ हिन्दस्वराज ’ लिखा .
30 नवम्बर , 1909दक्षिण अफ्रीका पहुँचे .
दिसम्बर , 1909दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के संघर्ष की प्रशंसा करते हुए और अनुबंध की प्रथा पर रोक लगाने की माँग करते हुए लाहौर कांग्रेस द्वारा संकल्प पारित .
4 अप्रैल , 1910लियो टॉल्सटाय को इण्डियन होमरूल की प्रति भेजी तथा उनसे उस पर सम्मति देने का अनुरोध किया .
30 मई , 1910टॉल्सटाय फार्म की नींव रखी .
4 दिसम्बर , 1910टॉल्स्टाय को श्रद्धांजलि अर्पित की
जनवरी , 1911अप्रवासी प्रतिवन्ध विधेयक में संशोधनों के सम्बन्ध में स्मट्स से लिखा - पढ़ी की . स्मट्स ने आश्वासन दिया कि कानूनों में रंग भेद सम्बन्धी कोई दोष नहीं रहेगा .
27 मार्च , 1911केपटाऊन में स्मट्स से साक्षात्कार किया .
22 अप्रैल , 1911निष्क्रिय प्रतिरोध आन्दोलन को निलम्बित करने पर स्मट्स भारतीयों द्वारा माँगे गए आश्वासन देने के लिए सहमत हो गए .
3 मई , 1911स्मट्स से भेंट की . स्मट्स द्वारा एशियाई पंजीकरण तथा अप्रवासी प्रतिबन्ध अधिनियम को रद्द करने का वचन देने पर एक अस्थायी समझौता हुआ .
24 जून , 1911राज्याभिषेक के अवसर पर सम्राट के प्रति निष्ठा व्यक्त की .
8 दिसम्बर , 1911गोखले को दक्षिण अफ्रीका आने के लिए आमन्त्रित किया .
16 मार्च , 1912गोखले द्वारा अनुबन्ध प्रथा का उन्मूलन करने के प्रयत्नों की प्रशंसा की .
12 सितम्बर , 1912फीनिक्स ट्रस्ट की स्थापना की .
22 अक्टूबर , 1912गोखले के साथ दक्षिण अफ्रीका , लौरेन्को , मारकीस मोजम्बिक एवं जंजीबार का दौरा किया . यूरोपीय परिधान एवं दूध का त्याग कर दिया .
18 जनवरी , 1913‘ इण्डियन ओपिनियन ’ में वर्ष के अन्त तक भारत वापस जाने की संभावना का जिक्र किया .
14 मार्च , 1913सिअरले के सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि दक्षिण अफ्रीका में हुए भारतीय विवाह अमान्य है .
30 मार्च , 1913सिअरले के निर्णय का भारतीयों की विशाल जनसभा द्वारा विरोध .
7 जून , 1913भेदभाव मूलक कानूनों का कठोरता से प्रयोग किए जाने तया सत्याग्रह फिर से प्रारम्भ होने की सम्भावना को ध्यान में रखते हुए भारत लौट जाने का विचार स्थगित कर दिया
15 सितम्बर , 1913निष्क्रिय प्रतिरोध का पुनः प्रारम्भ .
16 सितम्बर , 1913कस्तूरबा को बन्दी बनाया गया .
17 अक्टूबर , 1913न्यू कासन गए , अनुवन्धित भारतीयों से आग्रह किया कि जब तक 3 पाउंड का कर रद्द न कर दिया जाए तब तक काम बन्द कर दें . 300 खनिकों ने हड़ताल कर दी ,
24 अक्टूबर , 1913ट्रांसवाल की ओर मार्च करने का प्रस्ताव किया गया
28 अक्टूबर , 1913न्यू कासल से मार्च प्रारम्भ हुआ .
30 अक्टूबर , 1913चार्ल्स टाऊन पहुँचे .
3 नवम्बर , 1913गिरफ्तारी देने के लिए ट्रांसवाल की ओर मार्च की घोषणा की .
6 नवम्बर , 1913ग्रेट मार्च का नेतृत्व किया . पामफोई में गिरफ्तार किए गए .
7 नवम्बर , 1913फोक्सरुस्ट में जमानत पर रिहा कर दिए गए , मार्च करने वालों में फिर सम्मिलित हो गए .
8 नवम्बर , 1913स्टैडरटन में गिरफ्तार किए गए , मुचलके पर रिहाई , मार्च जारी .
9 नवम्बर , 1913टीकवर्थ में गिरफ्तार किए गए , वेलफोट में ले जाए गए .
11 नवम्बर , 1913डंडी में नौ माह के कटोर कारावास का दण्ड दिया गया .
13 नवम्बर , 1913फोक्सरुस्ट जेल ले जाए गए .
14 नवम्बर , 1913फोक्सरुस्ट में नया अभियोग चलाए जाने पर तीन माह का दण्ड दिया गया .
18 दिसम्बर 1913बिना शर्त रिहा कर दिए गए . अनुबन्धित मजदूरों की पोशाक पहनने लगे . एक बार भोजन करने का निश्चय किया गया .
13-16 जनवरी , 1914स्मट्स से साक्षात्कार किया , प्रस्ताव प्रस्तुत किए .
22 जनवरी , 1914स्मट्स से समझौता हो जाने पर सत्याग्रह स्थगित कर दिया गया . फार्म के निवासियों के नैतिक चूक के लिए पश्चात्ताप के रूप में 14 दिन का उपवास किया .
जून , 1914भारतीय राहत अधिनियम पारित किया गया .
18 जुलाई , 1914भारत के लिए इंग्लैण्ड के रास्ते जलपोत से रवाना हुए .
4 अगस्त , 1914लन्दन पहुंचे .
अक्टूबर , 1914भारतीय स्वयंसेवक कोर की स्थापना की . स्वयंसेवक कोर की तैनाती . कोर के कार्य में प्रशासनिक हस्तक्षेप होने पर सत्याग्रह किया .
19 दिसम्बर , 1914भारत के लिए जलपोत से रवाना हुए .
9 जनवरी , 1915भारत पहुँचे . एम्बुलेन्स सेवाओं के लिए कैसर - ए - हिन्द स्वर्णपदक से सम्मानित किया गया .
20 मई , 1915अहमदाबाद में सत्याग्रह आश्रम की स्थापना की ( इसी आश्रम को बाद में साबरमती आश्रम कहा गया ) .
1915-16भारत और बर्मा का दौरा किया . रेल में तृतीय श्रेणी की यात्रा की .
1917अनुबन्धित भारतीयों के उत्प्रवास के विरुद्ध सफलतापूर्वक आन्दोलन चलाया . बड़े पैमाने पर हस्तनिर्मित कपड़ा बनाने के लिए चरखे के उपयोग का मन में विचार आया .
अप्रैल , 1917नील की खेती में मजदूरों के हालात की जाँच करने के लिए चम्पारन ( बिहार ) गए . बन्दी बनाए गए और बाद में छोड़ दिए गए . रैयत की शिकायतों की जाँच करने के लिए बिहार सरकार द्वारा गठित समिति के सदस्य नियुक्त हुए .
जनवरी - मार्च , 1918अहमदाबाद में कपड़ा मजदूरों का मामला हाथ में लिया और विवाद को शांतिपूर्वक हल करने के लिए उपवास किया . फसल न होने पर लगान मुल्तवी कराने के लिए जिला खेड़ा ( बम्बई ) में सत्याग्रह प्रारम्भ किया .
27 अप्रैलदिल्ली में वायसराय के युद्ध सम्मेलन में भाग लिया और उसे हिन्दुस्तानी में संबोधित किया . तत्पश्चात् सेना में लोगों की भर्ती के लिए खेड़ा जिले का दौरा किया .
28 फरवरी , 1919रौलट बिल को वापस लिया जाए , इसके लिए सत्याग्रह करने की शपथ पर हस्ताक्षर किए .
6 अप्रैलअखिल भारतीय सत्याग्रह आंदोलन का उद्घाटन किया , देशव्यापी हड़ताल हुई .
8-11 अप्रैल , 1919पंजाब में प्रवेश न करने के आदेश को मानने से इनकार करने के लिए दिल्ली जाते हुए वंदी बनाए गए , बम्बई वापस लाया गया . अनेक शहरों में हिंसा भड़क उटी .
13 अप्रैलअमृतसर में जलियांवाला बाग की दुःखद घटना घटी . सेना ने निहत्ये लोगों पर गोलियां चलाई जिससे 1000 से अधिक लोगों की जानें गई . साबरमती आश्रम के पास सार्वजनिक सभा को सम्बोधित किया और पश्चाताप के रूप में तीन दिन के उपवास की घोषणा की .
14 अप्रैलनाडियाड में सत्याग्रह के बारे में अपनी ‘ भयंकर भूल ’ को स्वीकार किया . पंजाब में मार्शल लॉ की घोषणा हुई
18 अप्रैलसत्याग्रह स्थगित कर दिया .
सितम्बरगुजराती मासिक पत्रिका ' नवजीवन का सम्पादन सँभाला : बाद में , यह हिन्दी में भी साप्ताहिक पत्रिका के रूप में प्रकाशित हुआ .
अक्टूबरअंग्रेजी साप्ताहिक ' यंग इंडिया ' का संपादन संभाला ; पंजाब में सरकारी ज्यादतियों की जांच के लिए गठित गैर - सरकारी समिति में सम्मिलित हुए .
24 नवम्बरदिल्ली में अखिल भारतीय खिलाफत सम्मेलन की अध्यक्षता की .
दिसम्बरअमृतसर में , कांग्रेस द्वारा मांटेग्यू - चेम्सफोर्ड सुधारों को स्वीकार किए जाने की सलाह दी .
जनवरी 1920तुर्की के सुल्तान को ( जो मुसलमानों का खलीफा भी था ) इस्लाम के पवित्र स्थलों पर अपने अधिराजत्व से वंचित न करने के लिए ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालने के उद्देश्य से वायसराय के पास जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया .
1 अगस्तकैसर - ए - हिंद पदक , जुलू युद्ध पदक तथा बोअर युद्ध पदक को वापस करते हुए वायसराय को पत्र लिखा .
सितम्बरकलकत्ता में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विशेष अधिवेशन द्वारा पंजाब और खिलाफत सम्बन्धी अन्यायों की समाप्ति के लिए गांधीजी के असहयोग कार्यक्रम की स्वीकृति .
नवम्बरअहमदाबाद में गुजरात विद्यापीठ की स्थापना की .
दिसम्बरनागपुर कांग्रेस में उनके इस संकल्प को स्वीकार किया गया कि कांग्रेस का उद्देश्य भारतीयों के लिए सभी वैध और शांतिपूर्ण साधनों द्वारा स्वराज की प्राप्ति है .
अप्रैल , 1921राष्ट्रीय रचनात्मक आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए भारत में कांग्रेस के एक करोड़ सदस्य बनाने , तिलक स्वराज फंड के लिए एक करोड़ रुपया जमा करने और 20 लाख चरखों की स्थापना का कार्यक्रम प्रारम्भ किया .
अगस्तविदेशी वस्त्रों के पूर्ण बहिष्कार के अभियान का नेतृत्व किया और बम्बई में विदेशी कपड़ों की विशाल होली जलाई .
दिसम्बरअहमदाबाद अधिवेशन में कांग्रेस द्वारा उन्हें अपना सर्वेसर्वा ( डिक्टेटर ) मानकर सम्पूर्ण शक्तियाँ प्रदान की गई .
1 फरवरी , 1922बारदोली ( गुजरात ) में सत्याग्रह आंदोलन चलाने के इरादे का वायसराय को नोटिस दिया .
5 फरवरीचौरीचीरा ( उत्तर प्रदेश ) की दुखांत घटना पर , जिसमें भीड़ द्वारा 21 पुलिस कांस्टेबलों और एक उपनिरीक्षक को जिंदा जला दिया गया था , पांच दिन का उपवास किया और सत्याग्रह आंदोलन की योजना को त्याग दिया .
10 मार्चसाबरमती में राजद्रोह के लिए गिरफ्तार किया गया और ( 18 मार्च को ) छह वर्ष के कारावास का दंड दिया गया .
जनवरी - फरवरी , 1924सैसून अस्पताल , पूना में ( 12 जनवरी को ) ऐपेंडिसाइटिस का आपरेशन किया गया और 5 फरवरी को उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया .
अप्रैल‘ यंग इंडिया ’ और ' नवजीवन ' पत्रिकाओं के सम्पादक का कार्य फिर से हाथ में लिया .
18 सितम्बरहिन्दू - मुस्लिम एकता के लिए 21 दिन का उपवास प्रारम्भ किया .
दिसम्बरवेलगांव में कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता की .
सितम्बर 1925चरखा कातने वालों के अखिल भारतीय संघ की स्थापना की .
नवम्बरआश्रमवासियों द्वारा किए दुष्कर्मों के लिए उनकी ओर से सात दिन का उपवास किया . अपनी आत्मकथा ' द स्टोरी ऑफ माई एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ ' लिखना प्रारम्भ किया .
नवम्बर 1927लंका की यात्रा पर गए .
दिसम्बर 1928कलकत्ता कांग्रेस में यह संकल्प प्रस्तुत किया कि यदि 1929 के अन्त तक भारत को स्वतंत्र उपनिवेश का दर्जा नहीं दिया जाता तो फिर उसका लक्ष्य स्वतंत्रता ही होगा .
दिसम्बर 1929लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में उनके आग्रह पर यह घोषित किया गया कि कांग्रेस के मतानुसार स्वराज का अर्थ है पूर्ण स्वराज ( अर्थात् पूर्ण स्वतंत्रता ) .
फरवरी 1930अखिल भारतीय कांग्रेस समिति द्वारा साविनय अवज्ञा आंदोलन चलाने के लिए कांग्रेस के सर्वेसर्वा ( डिक्टेटर ) नियुक्त किए गए .
2 मार्चवायसराय को पत्र लिखा कि यदि कांग्रेस की मांगों को नहीं माना गया तो वे नमक कानून भंग करेंगे .
12 मार्चडांडी समुद्र - तट के लिए यात्रा आरम्भ की , जहाँ उन्होंने औपचारिक रूप से नमक हाथ में लिया ( अप्रैल 6 ) .
5 मईगिरफ्तार किए गए और बिना मुकदमा चलाए जेल भेज दिए गए ; संपूर्ण भारत में हड़ताल हुई : वर्ष की समाप्ति तक 1,00,000 से भी ज्यादा लोगों को जेल भेजा गया .
26 जनवरी , 1931जेल से बिना शर्त रिहा कर दिया गया .
फरवरी - मार्चवायसराय के साथ कई बार वार्ता हुई जिसके परिणामस्वरूप इरविन - गांधी समझौता हुआ .
29 अगस्तद्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लेने के लिए समुद्र के रास्ते इंग्लैंड के लिए रवाना हुए .
सितम्बर - दिसम्बरसम्मेलन के सत्रों में भाग लिया .
5 दिसम्बरइंग्लैण्ड से भारत के लिए प्रस्थान .
28 दिसम्बरबम्बई उतरे .
4 जनवरी , 1932गिरफ्तार किए गए और बिना मुकदमा चलाए जेल में डाल दिए गए .
20 सितम्बरसाम्प्रदायिक अधिनिर्णय में हरिजनों के लिए अलग निर्वाचन मंडलों की व्यवस्था का उन्मूलन कराने के लिए जेल में ' आमरण अनशन ' प्रारम्भ किया .
26 सितम्बरभारत सरकार द्वारा हरिजनों के सम्बन्ध में उनकी मांगें मान लिए जाने पर उपवास तोड़ दिया .
11 फरवरी 1933अंग्रेजी और हिंदी में प्रकाश्य साप्ताहिक पत्र ' हरिजन ' की स्थापना की .
8 मईआत्मशुद्धि के लिए दोपहर से 21 दिन का उपवास प्रारम्भ किया , रात 9 बजे बिना शर्त रिहा कर दिए गए .
9 मईसविनय अवज्ञा आंदोलन छह सप्ताह के लिए स्थगित करने की घोषणा की और सरकार से अपने अध्यादेशों को वापस लेने की मांग की .
29 मईउपवास तोड़ दिया .
26 जुलाईसत्याग्रह आश्रम को विघटित कर दिया .
30 जुलाईसविनय अवज्ञा आंदोलन को फिर से प्रारम्भ करने के लिए अहमदाबाद से रास तक 33 अनुगामियों सहित मार्च करने के अपने निर्णय की सूचना बम्बई सरकार को दी .
31 जुलाईगिरफ्तार कर लिए गए और मुकदमा चलाए बिना जेल भेज दिए गए .
4 अगस्तछोड़ दिए गए और एक प्रतिबंध आदेश को भंग करने के लिए फिर से बंदी बना लिए गए .
16 अगस्तछूआछूत - विरोधी प्रचार को जारी रखने के लिए सुविधाओं से वंचित किए जाने पर उपवास किया .
23 अगस्तबिना शर्त रिहा कर दिया गया .
7 नवम्बरहरिजन - उद्धार के लिए दौरा प्रारम्भ किया .
17 सितम्बर , 1934ग्रामीण उद्योगों के विकास , हरिजन - सेवा और बुनियादी हस्तशिल्पों के जरिए शिक्षा देने के कार्य में लग जाने के लिए 1 अक्टूबर से राजनीति से संन्यास लेने के निर्णय की घोषणा की .
26 अक्टूबरअखिल भारतीय ग्रामोद्योग संघ का उद्घाटन किया .
30 अप्रैल , 1936मध्यप्रांत में वर्धा के निकट एक गांव , सेवाग्राम को अपना मुख्यालय बनाकर वहीं रहने लगे .
22 अक्टूबर , 1937वर्धा में शिक्षा सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए बुनियादी हस्तशिल्पों के जरिए शिक्षा देने की अपनी योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की .
3 मार्च , 1939प्रशासन में सुधार लाने के शासन के वायदे को पूरा कराने के लिए राजकोट में आमरण अनशन ' प्रारम्भ किया और वायसराय के हस्तक्षेप पर 7 मार्च को यह अनशन समाप्त कर दिया .
जुलाई तथा सितम्बर 1940युद्ध की स्थिति के सम्बन्ध में चर्चा करने के लिए वायसराय द्वारा निमंत्रित किए जाने पर उनसे भेंट की .
अक्टूबरवैयक्तिक सविनय अवज्ञा के लिए स्वीकृति दी , सत्याग्रह विषय पर ' हरिजन ' में प्रकाश्य रिपोर्टों तथा लेखों के पूर्व - सेंसर की सरकारी मांग पर ' हरिजन ' और संबद्ध साप्ताहिक - पत्रों का प्रकाशन स्थगित कर दिया गया .
30 दिसम्बर , 1941अपने ही अनुरोध पर कांग्रेस कार्यकारिणी समिति द्वारा कांग्रेस के नेतृत्व से भारमुक्त हुए .
18 जनवरी , 1942 हरिजन ' और सम्बद्ध साप्ताहिक पत्रिकाएं फिर से प्रारम्भ की गई .
27 मार्चनयी दिल्ली में सर स्टैफोर्ड क्रिप्स से भेंट की ; तत्पश्चात् क्रिप्स के प्रस्तावों को एक ' उत्तरदिनांकित ' ( पोस्ट डेटेड ) चैक बताया .
मई ब्रिटिश सरकार से ' भारत छोड़ने के लिए अपील किया गया .
8 अगस्त भारत छोड़ो ' संकल्प के निहितार्थों पर प्रकाश डालने के लिए वम्बई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक को सम्बोधित किया .
9 अगस्तगिरफ्तार किए गए और पूना में आगा खाँ महल में नजरबन्द कर दिए गए .
15 अगस्तआगा खाँ महल में गांधीजी के निजी सचिव महादेव देसाई का हृदयगति रुक जाने से देहांत . अगस्त - दिसम्बर दंगों के सम्बन्ध में वायसराय तथा भारत सरकार से पत्राचार ,
10 फरवरी , 194321 दिन का उपवास प्रारम्भ किया , जो 3 मार्च को तोड़ा .
22 फरवरी , 1944 आगा खौं महल में कस्तूरबा गांधी का निधन .
6 मईबिना शर्त रिहा किया गया .
9-27 सितम्बरएम . ए . जिन्ना से पाकिस्तान के सम्बन्ध में बातचीत जारी रखी .
2 अक्टूबर75 वें जन्म - दिवस के अवसर पर कस्तूरबा स्मारक के लिए 110 लाख रुपए ( 8.25,000 पौंड ) की राशि भेंट की गई .
17 अप्रैल , 1945आगामी सेनफ्रांसिस्को सम्मेलन के सम्बन्ध में एक वक्तव्य में घोषणा करते हुए कहा कि , " समानता और भारत की स्वतंत्रता के बिना शांति असम्भव है . " जर्मनी और जापान के लिए भी न्यायोचित शांति की मांग की .
19 दिसम्बरशांति निकेतन में सी . एफ . एंइज स्मारक अस्पताल की नींव रखी .
दिसम्बर - जनवरी 1945-46बंगाल और असम का दौरा किया .
जनवरी तथा फरवरी , 1946 छूआछूत के विरोध तथा हिंदुस्तानी के प्रचार के लिए दक्षिण भारत का दौरा किया .
10 फरवरी हरिजन और सम्बद्ध साप्ताहिक पत्रिकाओं का प्रकाशन फिर से आरम्भ किया .
अप्रैल दिल्ली में केविनेट मिशन के साथ राजनीतिक वार्ता में भाग लिया .
5-12 मईशिमला गए : शिमला सम्मेलन आयोजित : विचार - विमर्श निष्फल सिद्ध हुआ .
16 मईकेबिनेट मिशन ने अपनी योजना की घोषणा की .
18-19 मई केबिनेट मिशन के साथ उनकी योजना पर चर्चा की .
26 मईतत्कालीन परिस्थितियों में , ब्रिटिश सरकार द्वारा तैयार किए गए दस्तावेज को सर्वश्रेष्ठ माना .
6 जूनमसूरी गए .
7 जूनदिल्ली वापस आए .
10 जूनमित्र देशों की विजय पर यह कहते हुए हर्ष प्रकट करने से इन्कार किया कि यह " असत्य पर सत्य की विजय नहीं है . "
11 जूनवायसराय ने गांधीजी से साक्षात्कार किया ; केन्द्र में साझा सरकार का प्रस्ताव रखा .
16 जूनकेबिनेट मिशन की बातचीत स्थगित हो गई : वायसराय ने अन्तरिम सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा .
18 जूनकांग्रेस कार्यकारिणी समिति ने अंतरिम सरकार की योजना को स्वीकार करने का निर्णय लिया .
20-21 जूनकार्यकारिणी समिति की बैठक में भाग लिया , क्रिप्स ने गांधीजी से भेंट की .
23 जूनकांग्रेस को अंतरिम सरकार में शामिल न होकर केवल संविधान सभा में सम्मिलित होने की सलाह दी .
24 जूनकेबिनेट मिशन से भेंट की .
28 जूनदिल्ली से पूना के लिए रवाना हुए . रास्ते में गाड़ी को पटरी से उतारने के प्रयत्न किए गए .
7 जुलाईबम्बई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति को सम्बोधित किया ; कांग्रेस ने कैबिनेट मिशन की 16 मई की योजना को स्वीकार कर लिया .
31 जुलाईजिन्ना ने ' सीधी कार्रवाई करने की धमकी दी .
12 अगस्तवायसराय ने कांग्रेस को अस्थायी सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने की घोषणा की .
16-18 अगस्तकलकत्ता में भीषण नर - संहार .
24 अगस्तवायसराय वैवल ने योजना का रेडियो पर प्रसारण किया .
27 अगस्तगांधीजी ने ब्रिटिश सरकार से बंगाल त्रासदी को दोहराने के विरुद्ध चेतावनी देते हुए तार दिया ; वेवेल को भी पत्र लिखा .
4 सितम्बरअंतरिम सरकार बनाई गई .
26 सितम्बरवेवेल से साक्षात्कार किया .
9 अक्टूबरजिन्ना की 9 - सूत्री मांगों के विषय में कांग्रेस को सूचित किया गया .
10 अक्टूबरनौआखली में नरसंहार .
15 अक्टूबरमुस्लिम लीग अंतरिम सरकार में सम्मिलित होने के लिए सहमत हो गई .
28 अक्टूबरकलकत्ता के लिए प्रस्थान . बिहार में दंगे - फसाद प्रारम्भ .
6 नवम्बरनौआखली के लिए प्रस्थान , आंशिक उपवास ' के बारे में वक्तव्य जारी किया , नौआखली का दौरा आरम्भ .
20 नवम्बरबिना किसी को साथ लिए अकेले ही नौआखली के दौरे पर निकल पड़े .
20 दिसम्बरश्रीरामपुर में एक माह का प्रवास पूरा किया
25 दिसम्बरनोआखाली में उन्होंने कहा , " ईश्वर मेरी जमकर परीक्षा ले रहा है " .
30 दिसम्बरजवाहरलाल नेहरू गांधी से आकर मिले जिनसे उन्होंने कहा , “ मेरा विवेक मेरे हृदय के भावों का पूरी तरह समर्थन कर रहा है " .
2 जनवरी , 1947उन्होंने कहा , " मेरे चारों तरफ अंधेरा - ही - अंधेरा है " . श्रीरामपुर से पैदल दौरे पर चल पड़े ,
3-29 जनवरीबिहार में दंगों से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया .
30 जनवरीपटना से दिल्ली के लिए रवाना हुए . नए वायसराय माउंटबेटन दिल्ली पहुँचे .
1-2 अप्रैलगांधीजी ने दिल्ली में एशियाई सम्बन्ध सम्मेलन को सम्बोधित किया .
15 अप्रैलजिन्ना के साथ मिलकर साम्प्रदायिक सद्भाव कायम करने के लिए संयुक्त रूप से अपील जारी की गई .
29 अप्रैलबिहार गए
1 मईकांग्रेस कार्यकारिणी ने सैद्धांतिक रूप से देश का विभाजन स्वीकार कर लिया .
5 मईएक साक्षात्कार में गांधीजी ने इस बात से इनकार किया कि भारत का साम्प्रदायिक आधार पर विभाजन अपरिहार्य है .
24 मईबिहार से दिल्ली के लिए प्रस्थान किया .
31 मईगांधीजी ने घोषणा की कि विभाजन से पहले शांति स्थापित होनी चाहिए . यह भी कि वे भारत के जीवच्छेदन ( विभाजन ) के निर्णय में भागीदार नहीं हैं .
2 जूनवायसराय ने देश - विभाजन की योजना प्रस्तुत की ; कांग्रेस कार्यकारिणी समिति ने इसे अपनी स्वीकृति दी .
3 जूनभारतीय नेताओं द्वारा माउंटबेटन की योजना पर रेडियो भाषण .
6 जूनगांधीजी ने पाकिस्तान को स्वीकार करते हुए माउंटबेटन को लिखा कि वे जिन्ना को कांग्रेस के साथ पिछले सभी विवादग्रस्त विषयों को मित्रतापूर्ण ढंग से निपटाने के लिए राजी करें
12 जूनकांग्रेस कार्यकारिणी समिति को सम्बोधित किया .
जुलाईभारत स्वतंत्रता बिल पास हुआ .
27 जुलाईभारत की रियासतों के राजाओं से जनता के वर्चस्व को एक विशेषाधिकार मानने की अपील की .
14 अगस्तअंग्रेजों की दासता से मुक्ति पाने पर अगले दिन का हर्षोल्लास दिवस के रूप में स्वागत , परन्तु देश विभाजन की निंदा , पाकिस्तान का जन्म .
15 अगस्तकलकत्ता में हिंदू - मुसलमानों में भाई - चारा
16 अगस्तकलकत्ता में हुए इस चमत्कार का स्वागत
1 सितम्बरकलकत्ता की शांति को नौ दिन का आश्चर्य बताया , उपवास का निश्चय .
2 सितम्बरकलकत्ता के घर में भारी भीड़ ने उन्हें घेरा , नोआखाली जाने का विचार त्याग दिया , शांति के लिए किए जाने वाले प्रयत्नों को तेज किया .
4 सितम्बरउपवास तोड़ दिया .
7 सितम्बरकलकत्ता से दिल्ली के लिए प्रस्थान ; दंगों से पीड़ित क्षेत्रों का प्रतिदिन दौरा करना प्रारम्भ किया
24 सितम्बरपाकिस्तानी हमलावरों द्वारा कश्मीर पर हमला .
25 सितम्बरकश्मीर भारतीय संघ में सम्मिलित हुआ .
26 सितम्बरचर्चिल के ' भारत में सर्वनाश ' वक्तव्य की आलोचना .
1 नवम्बरभारतीय सेना का जूनागढ़ में प्रवेश .
3 नवम्बरजूनागढ़ भारत में सम्मिलित हो गया . अखिल भारतीय कांग्रेस समिति को सम्बोधित किया .
11 नवम्बरजूनागढ़ के भारत में सम्मिलित होने का समर्थन .
25 दिसम्बरभारत और पाकिस्तान के बीच मित्रतापूर्ण समझौते का आग्रह .
30 दिसम्बरभारत द्वारा कश्मीर - विवाद संयुक्त राष्ट्र के समक्ष प्रस्तुत .
12 जनवरी , 1948दिल्ली में साम्प्रदायिक शांति के लिए उपवास करने का निर्णय , माउंटबेटन गांधीजी को उपवास न रखने के लिए राजी करने में असफल .
15 जनवरीस्वास्थ्य की स्थिति ' नाजुक ' . भारतीय मंत्रिमंडल द्वारा पाकिस्तान को देय 55 करोड़ की राशि अदा किए जाने के निर्णय का स्वागत किया . साम्प्रदायिक शांति की स्थापना के लिए उपवास जारी रखा .
17 जनवरीचिकित्सकों ने चेतावनी दी कि उपवास समाप्त कराना अब नितांत आवश्यक है . केन्द्रीय शांति समिति का गठन जिसने ' शांति के लिए शपथ लेने का निर्णय लिया .
18 जनवरीशांति समिति ने ' शपथ ' पर हस्ताक्षर किए , ' शांति - शपथ गांधीजी को प्रस्तुत की गई , गांधीजी ने उपवास तोड़ा .
20 जनवरीप्रार्थना सभा में बम फटा .
27 जनवरीमहरौली में मुसलमानों के मेले में गए .
29 जनवरीक्रुद्ध शरणार्थियों द्वारा गांधीजी से संन्यास लेकर हिमालय चले जाने की माँग .
30 जनवरीकांग्रेस को लोक सेवक संघ में रूपांतरित करने के लिए एक संविधान का प्रारूप तैयार किया : प्रार्थना सभा में जाते समय उनकी हत्या कर दी गई .

❊Information
File Name - महात्मा गाँधी - विचारधारा, जीवन घटनाक्रम
Language - Hindi
Size - 266 KB
Number of Pages -17
Writer -
Published By - Knowledge Hub
ISBN -
Copyright Date: 29-04-2021
Copyrighted By: Knowledge Hub
Source - Upkar Publication
Categories: Educational Materials
Suggested For: SSC Exams, UPSC Exams, RRB Exams , Competition Exams, All Competitive Exams,Etc.
Description - Mahatma Gandhi Notes PDF Free Download
Tags:Mahatma Gandhi Notes , Modern History Notes , Free PDF Book

Download PDF

Download & Share PDF With Friends

Download PDF
Free
Knowledge Hub

Your Knowledge Booster..!

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post