विश्व की प्रमुख जनजातियाँ ( Maior Tribes of the World )

✶ पृथ्वी पर मानव को रहते हुए लाखों वर्ष बीत चुके हैं । इसे लम्बी अवधि में मानव ने प्राकृतिक वातावरण के साथ समायोजन करना सीखा है ।

✶ मानव ने तकनीकी विकास के साथ - साथ वातावरण समायोजन में तेज गति से परिवर्तन किया है , किन्तु विश्व में कुछ ऐसे क्षेत्र हैं , जिनमें जनजातियां आदिम ढंग से जीवन यापन कर रही हैं ।

✺ जनजाति ( Tribes )

✶ जनजातियाँ जैविक समूह के साथ - साथ सामाजिक व सांस्कृतिक समूह का प्रतिनिधित्व करती हैं । यह लोगों का ऐसा समूह है , जो सामाजिक रीति - रिवाजों एवं सांस्कृतिक परम्पराओं द्वारा एक - दूसरे से घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित हैं ।

✶ जनजातियाँ शीत प्रदेशों , घने जंगलों , गर्म व शुष्क मरुस्थलों , घास के मैदानों एवं दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करती हैं ।

✶ जनजातियों की अर्थव्यवस्था का आधार भोजन एकत्रण , शिकार , घुमक्कड़ जीवन , पशुचारण व आदिम ढंग की निर्वहन कृषि प्रमुख हैं ।

✺ विश्व की प्रमुख जनजातियाँ ( Maior Tribes of the World )

✶ विश्व की प्रमुख जनजातियों में ध्रुवीय व ठण्डे प्रदेशों के एस्किमो , सैमोयड्स , विषुवतरेखीय प्रदेश के पिग्मी , सेमांग, सकाई, उष्ण व शुष्क मरुस्थल के बुशमैन , उष्ण कटिबंधीय घास क्षेत्रों के मसाई व बद्दू समशीतोष्ण कटिबन्धों के किरगीज व दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों के भील , गौंड , संथाल , मीणा , नागा आदि शामिल हैं ।

✺ एस्किमो ( Eskimos )

✶ एस्किमो का शाब्दिक अर्थ कच्चा मांस खाने वाला तथा बर्फीले प्रदेश के निवासी के रूप में होता है । इस जनजाति का सम्बन्ध मंगोल प्रजाति से है ।

✶ एस्किमो का चेहरा सपाट व चौड़ा , त्वचा का रंग पीलापन लिए भूरा , बाल भद्दे व काले , कद मध्यम , नाक चपटी तथा आँखे गहरी , कत्थई व तिरछी होती हैं ।

✶ एस्किमो लोग आर्कटिक व टुण्ड्रा प्रदेशों में रहते हैं , जिसमें अलास्का , ग्रीनलैण्ड व उत्तरी साइबेरिया इनके प्रमुख निवास क्षेत्र हैं ।

✶ कनाडा व ग्रीनलैण्ड में इन्हें एस्किमो , स्कैण्डिनेविया में लैप्स व उत्तरी साइबेरिया में सैमोयड्स , याकूत , चकची व तुंग नामों से जाना जाता है ।

✶ शिकार करना एस्किमो का प्रमुख व जीवन यापन का एकमात्र साधन है । एस्किमो के भाले को हारफून व इनकी नाव को कयाक कहा जाता है ।

✶ शीतकालीन आखेट की दो विधियाँ है — माउपाक व इतुरपाक । बसन्तकालीन आखेट को उतोक कहा जाता है ।

✶ ये लोग कच्चा मांस ( सील , हेल , सी लॉयन , ध्रुवीय भालू व अन्य जीव - जन्तु ) खाते हैं ।

✶ इनके वस्त्र कैरिबो, सील मछली की खाल व ध्रुवीय भालू के समूर से बनाए जाते हैं ।

✶ एस्किमो के जर्सीनुमा बाँहदार वस्त्र को तिमियाक व इसके ऊपर पहने जाने वाले कपड़े को अनोहाक तथा इनके जूतों को कार्मिक या मुक्लूक्स कहते हैं ।

✶ इनके मकान को इग्लू कहा जाता है , यह बर्फ से बना होता है । हड्डियों के ढाँचे से बने मकान को कर्मक कहते हैं । बर्फ पर चलने वाली पहिये रहित गाड़ी को स्लेज के नाम से जाना जाता है ।

✶ ये लोग पितृवंशीय , बहुपत्नी व जादू - टोने जैसी प्रथाओं में विश्वास रखते हैं । ये वातावरण समायोजन में सबसे अग्रणी हैं ।

✺ बुशमैन ( Bushman )

✶ कालाहारी के मरुस्थल में रहने वाले बुशमैन को सॉन , रव्वी व बसारवा के नाम से भी जाना जाता है । ये नाटे कद के हैं तथा निग्रीटो प्रजाति से सम्बन्धित हैं ।

✶ बुशमैन जनजाति अफ्रीका महाद्वीप में 18° दक्षिणी अक्षांशं से 24° दक्षिणी अक्षांश के मध्य बेचुआनालैण्ड में निवास करती है ।

✶ बुशमैन मुख्यतः शिकारी हैं । ये बड़े शिकार को कीचड़ में फँसाकर , फंदों में फंसाकर , गड्ढों में गिराकर व जहरीला जल पिलाकर मारते हैं ।

✶ ये सर्वभक्षी होते हैं और अधिक खाते हैं । दीमक , चींटियाँ व इनके अण्डे इनका प्रिय भोजन है ।

✶ बुशमैन बहुत कम वस्त्र पहनते हैं । पुरुष तिकोनी लंगोट पहनते हैं , जबकि स्त्रियाँ चोंगा पहनती हैं , जिसे क्रोस भी कहा जाता है ।

✶ इनके घर गुम्बदाकार झोंपड़ी के रूप में घास - टहनियों व जानवरों की खाल से बने होते हैं ।

✶ तीर - कमान , नुकीला भाला , बर्छा , अग्निदण्ड इनके प्रमुख औजार हैं ।

✶ ये लोग अण्डों के खोल के आभूषण , तीर - कमान , स्कर्ट आदि क्रॉफ्ट वस्तुएँ बनाते हैं ।

✺ भील ( Bhil )

✶ भील शब्द की उत्पत्ति द्राविड़ियन भाषा के बीलू से हुई है , जिसका अर्थ तीरंदाज होता है । इनका सम्बन्ध महादेव के पुत्र निषाद और महाभारतकालीन एकलव्य से भी माना जाता है ।

✶ भील भारत की संथाल व गौंड के बाद तीसरी बड़ी जनजाति है , जो राजस्थान के बाँसवाड़ा , डूंगरपुर , उदयपुर व चित्तौड़गढ़ , मध्यप्रदेश के धार , झाबुआ व रतलाम तथा गुजरात के पंचमहल व बड़ोदरा एवं महाराष्ट्र के औरंगाबाद , अहमदनगर , जलगाँव , नासिक व धुले जिलों में निवास करती हैं ।

✶ ये लोग नाटे कद , गहरे काले रंग , चौड़ी नाक , लाल आँख , रूखे बाल व सुडौल शरीर वाले होते हैं ।

✶ भील जनजाति खाद्य संग्रहण , आखेट कृषि व पशुपालन द्वारा अपनी जीविका चलाती है । इनके द्वारा की जाने वाली झमिंग कृषि को चिमाता ( पहाड़ी क्षेत्रों में ) व दजिया ( मैदानी क्षेत्रों में ) के नाम से जाना जाता है ।

✶ भीलों का मुख्य भोजन मक्का , चावल , राबड़ी व महुआ से निर्मित शराब है ।

✶ भीलों के आवास ( झोंपड़ी ) घास , मिट्टी , बाँस तथा खपरैल से बने होते हैं । इनके छोटे गाँवों के समूह को फला व बड़े गाँव को पाल कहते हैं ।

✶ भील लोग दो प्रकार के बाण - हरियो व रोबदो का प्रयोग शिकार हेतु करते हैं । पक्षियों को पकड़ने के लिए फटकिया रूपी फंदे का प्रयोग करते हैं ।

✶ इन लोगों में पितृसत्तात्मक , बहुपत्नी , दापा ( कन्या का मूल्य चुकाने की प्रथा ) व गोल गाधेड़ों प्रथा पाई जाती है ।

✶ घूमर व गैर इनके प्रमुख नृत्य हैं । वेणेश्वर मेला इनका प्रमुख मेला है तथा फाइरे - फाइरे इनका रणघोष है ।

✶ पाल का मुखिया गमेती कहलाता है तथा मार्गदर्शक को बोलावा कहते हैं ।

✺ गौंड ( Gond )

✶ गौंड विश्व का सबसे बड़ा जनजातीय समूह है , जो भारतीय प्रायद्वीप में निवास करता है ।

✶ गौंड शब्द की उत्पत्ति खोण्डा से हुई है , जिसका अर्थ है - पहाड़ी । गौंड अपने आप को कोइटुर या कोल भी कहते हैं ।

✶ गौंड जनजाति के कई वर्ग मध्यप्रदेश , छत्तीसगढ़ , झारखंड , तेलंगाना , महाराष्ट्र , उड़ीसा व आसाम में मिलते हैं । गौंड मख्यतः सतपुड़ा पहाड़ियों , मैकाल श्रेणी , सोन - देवगढ़ उच्च भूमि , बस्तर पठार व गढ़जात पहाड़ियों में रहते हैं ।

✶ गौंड लोगों का मुख्य व्यवसाय झूमिंग कृषि व आखेट हैं । ये वनों से प्राप्त उपजों के संग्रहण और पशुपालन का कार्य भी करते हैं । इनके द्वारा की जाने वाली झूमिग कृषि को दीप्पा कहा जाता है । मध्यप्रदेश में इसे पैंडा कहा जाता है ।

✶ ये लोग पशुओं की बलि देकर मांस खाते हैं , धूम्रपान करते हैं तथा महुआ से बनी शराब का प्रयोग करते हैं ।

✶ ये सूती वस्त्र पहनते हैं । पुरुष धोती तथा स्त्रियाँ साड़ी व चोली पहनती हैं । स्त्रियाँ चूड़ियाँ व गले में काले मनकों व कौड़ियों से बना हार भी पहनती हैं ।

✶ गौंड नंगले अर्थात् पल्ली और छोटे - छोटे गाँवों में रहते हैं । इनके मकान घास - फूस व मिट्टी के बने होते हैं ।

✶ गौंड जनजाति में सेवा विवाह , विनिमय विवाह , हरण विवाह व विधवा विवाह का प्रचलन मिलता है ।

✶ गाँव के मुखिया को पटेल अथवा मुखादम तथा गाँव के चौकीदार को कोतवार एवं गाँव के पुजारी या पुरोहित को देबारी कहा जाता है ।

✶ गौंड जनजाति के लोग गौंडी , तमिल , कन्नड़ , मराठी , तेलगू व हिन्दी भाषा बोलते हैं ।

✶ धूलिया गौंडों की प्रमुख गायक जाति है । गौंडों के चार वर्ग हैं , जिन्हें गौंडी भाषा में सगा कहते हैं ।

✶ बड़ा देव , शंभू महादेव व परशा पेन इनके प्रमुख देवता हैं । इनमें मिलने वाली कबाड़ी प्रथा को सरकार ने बंद कर दिया है ।

Also Read- जनजातियों से संबंधित पारिभाषिक शब्दावली

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