वाच्य - हिंदी व्याकरण

vaachy hindi vyakaran

वाच्य - वाक्य में प्रयुक्त क्रिया रूप कर्ता , कर्म या भाव किसके अनुसार प्रयुक्त हुआ है , इसका बोध कराने वाले कारकों को वाच्य कहते हैं ।

वाच्य के प्रकार

वाच्य तीन प्रकार के होते है ।

1 . कर्तृवाच्य
2 . कर्मवाच्य
3 . भाववाच्य

1 . कर्तृवाच्य : जब वाक्य में प्रयुक्त क्रिया का सीधा और प्रधान सम्बन्ध कर्ता से होता है , अर्थात् क्रिया के लिंग , वचन कर्ता के अनुसार प्रयुक्त होते हैं , उसे कर्तृवाच्य कहते हैं । जैसे -

( i ) लड़का दूध पीता है ।
( ii ) लड़कियाँ दूध पीती हैं ।

प्रथम वाक्य में ‘ पीता है । ’ क्रिया कर्ता ‘ लड़का ’' के अनुसार पुल्लिंग एक वचन की है जबकि दूसरे वाक्य में ‘ पीती हैं । ’ क्रिया कर्ता ‘ लड़कियाँ ’ के अनुसार स्त्रीलिंग , बहुवचन की है ।

विशेष : आदरार्थ ‘ आप ’ के लिए क्रिया सदैव बहुवचन में होती है जैसे - आप जा रहे हैं ।

2 . कर्मवाच्य : जब वाक्य में प्रयुक्त क्रिया का सीधा सम्बन्ध वाक्य में प्रयुक्त कर्म से होता है अर्थात् क्रिया के लिंग , वचन कर्ता के अनुसार न होकर कर्म के अनुसार होते हैं , उसे कर्मवाच्य कहते हैं । कर्मवाच्य सदैव सकर्मक क्रियाओं का ही होता है क्योंकि इसमें कर्म की प्रधानता रहती हैं जैसे -

( i ) राम ने चाय पी ।
( ii ) सीता ने दूध पीया ।

उपर्युक्त प्रथम वाक्य में क्रिया ‘ पी ’ स्त्रीलिंग एक वचन है जो वाक्य में प्रयुक्त कर्म ‘ चाय ’ ( स्त्रीलिंग , एकवचन ) के अनुसार आयी है । द्वितीय वाक्य में प्रयुक्त क्रिया ‘ पीया ’ पुल्लिंग , एकवचन में है जो वाक्य में प्रयुक्त कर्म ‘ दूध ’ ( पुल्लिंग , एकवचन ) के अनुसार है ।

कर्मवाच्य की दो स्थितियाँ होती हैं ।

( i ) कर्तायुक्त कर्मवाच्य
( ii ) कर्ता रहित कर्मवाच्य

( i ) कर्तायुक्त कर्मवाच्य : जब वाक्य में कर्ता विद्यमान हो तो वह तिर्यक कारक की स्थिति में होगा अर्थात् कर्ता कारक चिह्न , ( विभक्ति ) युक्त होगा तथा ऐसी स्थिति में क्रिया बीते समय की ( भूतकालिक ) होगी । जैसे -

नरेन्द्र ने मिठाई खाई ।
रोजी ने दूध पीया ।

( ii ) कर्ता रहित कर्मवाच्य : कर्ता रहित कर्मवाच्य की स्थिति में वाक्य में प्रयुक्त कर्म ही प्रत्यक्ष कर्ता के रूप में प्रयुक्त होता है । ऐसी स्थिति में क्रिया संयुक्त होती है । जैसे -

( i ) एक ओर अध्ययन हो रहा था , दूसरी ओर मैच चल रहा था ।

जबकि क्रिया की पूर्णता की स्थिति में क्रिया पद के गठन में आ । ई । ए मुख्यधातु में न जुड़कर उसके तुरन्त बाद में प्रयुक्त सहायक धातु में जुड़ते हैं । जैसे -

( i ) मोहन की घड़ी चुरा ली गई चोर पकड़ लिए गए ।

3 . भाववाच्य : जब वाक्य में प्रयुक्त क्रिया न तो कर्ता के अनुसार होती है , न कर्म के अनुसार , बल्कि असमर्थता के भाव के साथ वहाँ भाववाच्य होता है । जैसे -

( i ) आँखों में दर्द के कारण मुझ से पढ़ा नहीं जाता ।

इस स्थिति में अकर्मक क्रिया का ही प्रयोग भाव वाच्य में होता हैं ।

भाववाच्य की एक अन्य स्थिति यह भी है कि यदि क्रिया सकर्मक हो तथा कर्ता और कर्म दोनों तिर्यक ( विभक्ति चिह युक्त ) हों तो क्रिया सदैव पुल्लिंग , अन्यपुरुष , एकवचन , भूतकाल की होगी । जैसे -

( i ) राम ने रावण को मारा ।
( ii ) लड़कियों ने लड़कों को पीटा ।

वाच्य परिवर्तन

( i ) कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाना

कर्तृवाच्य में कर्ता की प्रधानता होती है , जबकि कर्मवाच्य में कर्म की । अतः किसी वाक्य को कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाते समय , वाक्य में कर्ता को प्रधानता न देकर उसे गौण बना दिया जाता है तथा कर्म को प्रधानता दी जाती है । कर्ता की गौण स्थिति भी दो प्रकार से हो सकती है । एक कर्ता को करण कारक या माध्यम के रूप में प्रयुक्त कर , उसके साथ ‘ से के द्वारा ’ आदि विभक्तियाँ लगाकर या दूसरी स्थिति में कर्ता का लोप ही कर दिया जाता है । जैसे- ‘ राम पत्र लिखेगा । ’ कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य रूप बनेगा ‘ राम द्वारा पत्र लिखा जाएगा । ’

अन्य उदाहरण

कर्तृवाच्य कर्मवाच्य
1 . कलाकार मूर्ति गढ़ता है । 1 . कलाकार द्वारा मूर्ति गढ़ी जाती है ।
2 . वह पत्र लिखता है । 2 . उसके द्वारा पत्र लिखा जाता है ।
3 . प्रशान्त ने पुस्तक पढ़ी । 3 . प्रशान्त द्वारा पुस्तक पढ़ी गई ।
4 . दादी कहानी सुनाएगी । 4 . दादी द्वारा कहानी सुनाई जाएगी ।
5 . मैं व्यायाम करता हूँ । 5 . मेरे द्वारा व्यायाम किया जाता है ।

( ii ) कर्तृवाच्य से भाववाच्य बनाना

कर्तृवाच्य में क्रिया कर्ता के अनुसार प्रयुक्त होती है जबकि भाववाच्य में प्रयुक्त क्रिया न कर्ता के अनुकूल होती है , न कर्म के अनुसार बल्कि वह असमर्थता के भाव के अनुसार होती है । अतः कर्तृवाच्य से भाववाच्य बनाते समय कर्ता के साथ ‘ से ’ लगाया जाता है या कर्ता का उल्लेख ही नहीं होता , किन्तु कर्ता के उल्लेख न होने की स्थिति तब होती है , जब मूल कर्ता सामान्य ( लोग ) हो । साथ ही मुख्य क्रिया के पूर्ण कृदन्ती क्रमों के बाद संयोगी क्रिया ‘ जा ’ लगती है ।

1 . मैं अब चल नहीं पाता । 1 . मुझे से अब चला नहीं जाता ।
2 . गर्मियों में लोग खूब नहाते हैं । 2 . गर्मियों में खूब नहाया जाता है ।
3 . वे गा नहीं सकते । 3 . उनसे गाया नहीं जा सकता ।

( iii ) कर्मवाच्य / भाववाच्य से कर्तृवाच्य बनाना

कर्तृवाच्य में कर्ता की प्रधानता होती है जबकि कर्मवाच्य में कर्म की अतः कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य बनाते समय पुनः कर्ता के अनुसार क्रिया प्रयुक्त कर देंगे । जैसे -

1 . उसके द्वारा पत्र लिखा जाएगा । 1 . वह पत्र लिखेगा ।
2 . बच्चों द्वारा चित्र बनाए गए । 2 . बच्चों ने चित्र बनाए
3 . गधे द्वारा बोझा ढोया गया । 3 . गधे ने बोझा ढोया ।

Also Read - जानिये भारत में कौन -कौन सी प्रथाएं प्रचलित थीं ?

Download PDF
346 KB

If Download Not Start Click Here

Post a Comment

0 Comments

Promoted Posts