Knowledge Booster - 4

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1. एनालॉग सिग्नल्स और डिजिटल सिग्नल्स में क्या अंतर होता है ?

➥हिंदी में एनालॉग को अनुरूप और सिग्नल कहते हैं । दोनों ही सिग्नलों का इस्तेमाल विद्युत सिग्नलों के जरिए सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के लिए किया जाता है । दोनों में फर्क यह है कि एनालॉग सिग्नल में सूचना विद्युत स्पंदनों के माध्यम से जाती है । डिजिटल तकनीक में सूचना बाइनरी फॉर्मेट ( शून्य और एक ) में बदली जाती है । कंप्यूटर सिर्फ बाइनरी संकेतों को ही समझता है । इसमें एक बिट दो भिन्न दिशाओं को व्यक्त करता है । इसे आसान भाषा में कहें तो कंप्यूटर डिजिटल है और पुराने मैग्नेटिक टेप एनालॉग । एनालॉग ऑडियो या वीडियो में वास्तविक आवाज या चित्र अंकित होता है जबकि डिजिटल में उसका बाइनरी संकेत दर्ज होता है , जिसे प्ले करने वाली तकनीक ऑडियो या वीडियो में बदलती है । टेप लीनियर होता है यानी यदि आपको कोई गीत सुनना है , जो टेप में दसवें मिनट पर आता है तो आपको बाकायदा टेप चलाकर 9 मिनट 59 सेकंड पार करने होंगे । इसके विपरीत डिजिटल सीडी या कोई दूसरा फॉर्मेट सीधा उन संकेतों पर जाता है । डिजिटल सिग्नल में आवाज सुनने वाला उपकरण डिजिटल सिग्नल पर चलता है । मैग्नेटिक टेप में जनरेशन लॉस होता है यानी एक टेप से दूसरे टेप में जाने पर गुणवत्ता गिरती है । डिजिटल प्रणाली में ऐसा नहीं होता ।

2. पोक्सो कानून का क्या अर्थ है ?

➥पोक्सो कानून का अर्थ है लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 ( प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ओफेंसेज ) यह कानून 19 जून 2012 से लागू किया गया और 18 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ किसी भी तरह का यौन बर्ताव इसके तहत आता है । इसके तहत लड़के और लड़की दोनों को ही संरक्षण प्राप्त है । इस तरह के मामलों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में होती है । बच्चों के साथ होने वाले इन यौन अपराधों में उम्रकैद तक की सजा हो सकती है ।

3. गारंटी और वारंटी में क्या अंतर है ?

➥सामान्य तौर पर गारंटी है किसी वस्तु की पूरी जिम्मेदारी वह खराब हो तो दुरुस्त करने या बदलने का आश्वासन । वारंटी का अर्थ है एक कीमत लेकर उस वस्तु को कारगर बनाए रखने का वादा ।

4. प्रॉक्सी युद्ध क्या होता है ?

➥प्रॉक्सी का अर्थ है किसी के बदले काम करना या किसी का प्रतिनिधित्व । किसी के बदले वोट देना या युद्ध लड़ना । दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर लड़ना या लड़ाना । यह युद्ध दो गुटों के बीच हो सकता है या फिर किसी एक का प्रॉक्सी युद्ध दूसरे से लड़ा जाए ।

5. सेना में फील्ड मार्शल किसे कहा जाता है और आजकल इस पद पर कौन है ?

➥फील्ड मार्शल पद एक तरह से थल सेना का सम्मान का पद है । हमारी सेना का सर्वोच्च पद जनरल ऑफ चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ का होता है । 1971 में बांग्लादेश युद्ध में विजय प्राप्त करने वाले जनरल सैम मानेकशॉ ( 3 अप्रैल 1914 से 27 जून 2008 ) को एक जनवरी 1973 में देश का पहला फील्ड मार्शल का पद दे दिया गया । वे भारतीय थलसेना को आठवे चीफ ऑफ स्टाफ थे लेकिन फील्ड मार्शल बनने वाले पहले सेना के अधिकारी थे । सैम मानेकशॉ को यह पद देने के बाद 1986 में जनरल के एम करियप्पा ( 29 दिसंबर 1899 से 15 मई 1993 ) को फील्ड मार्शल का पद दिया गया । चूंकि 1973 में मानेकशॉ को यह पद दिया जा चुका था इसलिए देर से ही सही , यह ओहदा उन्हें सेवानिवृत्त होने के तकरीबन 30 साल बाद दिया गया । जनरल करियप्पा 1947 में स्वतंत्रता के बाद भारतीय सेना के पहले कमांडर इन चीफ थे । उन्हें सम्मान देते हुए ही फील्ड मार्शल को पदवी दी गई ।

6. रेल की अंतिम बोगी पर X का चिन्ह क्यों अंकित होता है ?

➥रेलगाड़ी के आखिरी डिब्बे पर कोई निशान होना जरूरी है , ताकि उन पर नजर रखने वाले कर्मचारियों को पता रहे कि पूरी गाड़ी गुजर गई है । सफेद या लाल रंग से बना यह बड़ा सा X दरअसल आखिरी डिब्बे की निशानी है । इसके अलावा अब ज्यादातर गाड़ियों के अंतिम डिब्बे पर बिजली का एक लैंप भी लगाया जाता है , जो रह - रहकर चमकता है । पहले यह लैंप तेल का होता था लेकिन अब यह बिजली का होता है । इस लैंप को लगाना नियमानुसार आवश्यक है । इसके अलावा इस आखिरी डिब्बे पर अंग्रेजी में काले या सफेद रंग का एलवी लिखा एक बोर्ड भी लटकाया जाता है । एलवी का अर्थ है लास्ट व्हीकल । यदि किसी स्टेशन या सिग्नल केबिन से कोई ऐसी गाड़ी गुजरे जिस पर लास्ट व्हीकल न लिखा हो तो माना जाता है कि पूरी गाड़ी नहीं आ पाई है । ऐसे में आपातकालीन कार्यवाई शुरू हो जाती है ।

7. बंदूक चलाने पर पीछे की ओर झटका क्यों लगता है ?

➥न्यूटन का गति विषयक तीसरा नियम " कहता है कि प्रत्येक क्रिया की बराबर व विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है । जब बंदूक की गोली आगे की ओर बढ़ती है , तो वह पीछे की ओर धक्का लगाती है । गोली तभी आगे बढ़ती है जब बंदूक का बोल्ट उसके पीछे से प्रहार करता है । तोप से गोला दागने पर भी यही होगा ।

8. मिस्र के पिरामिडों का निर्माण किस तरह से हुआ था ?

➥मिस्र के पिरामिड वहां के तत्कालीन फराओ ( सम्राट ) के स्मारक स्थल हैं । इनमें सम्राट और उसके परिवार वालों के शवों को दफनाकर रखा गया है । इन शवों को ममी कहा जाता है । उनके शव के साथ भोजन सामग्री , पेय पदार्थ , वस्त्र , गहने , बर्तन , वाद्य यंत्र , हथियार , जानवर और कभी - कभी तो सेवक सेविकाओं को भी दफना देते थे । मिस्र के पुराने पिरामिड एक पुराने प्रांत की राजधानी मैम्फिस के पश्चिमोत्तर में स्थित सक्कारा में मिले हैं । इनमें सबसे पुराना जोसर का पिरामिड है , जिसका निर्माण ईसा पूर्व 2630 से 2611 के बीच हुआ होगा । पिरामिडों को देखकर उन्हें बनाने की तकनीक , सामग्री और इस काम में लगे मजदूरों की संख्या की कल्पना करते हुए हैरत होती है । एक बड़े पिरामिड का निर्माण करने में पचास हजार से एक लाख तक मजदूर लगे हों , तो भी कोई आश्चर्य नहीं । मिस्र में 138 पिरामिड हैं । इनमें काहिरा के उपनगर गीजा को ' गेट पिरामिड ' शानदार है । यह प्राचीन विश्व के सात अजूबों की सूची में शामिल है । इन सात प्राचीन आश्चर्यों में यह स्मारक ही एकमात्र ऐसा स्मारक है , जिसे समय के थपेड़े खत्म नहीं कर पाए । यह स्मारक 450 फुट ऊंचा है । 43 सदियों तक यह दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बनी रही । 19वीं सदी में इसकी ऊंचाई का कीर्तिमान टूटा । इसका आधार 13 एकड़ में फैला है , जो करीब 16 फुटबॉल मैदानों जितना है । यह 25 लाख शिलाखंडों से निर्मित है , जिसमें हर एक का वजन दो से तीस टन के बीच है । ग्रेट पिरामिड को इतनी परिशुद्धता के साथ बनाया गया है कि इसे आज भी बनाना आसान नहीं है । कुछ समय पहले तक ( लेजर के जरिए मापन करने का उपकरण ईजाद होने तक ) वैज्ञानिक इसकी सूक्ष्म सममिति ( सिमिट्रीज ) का पता नहीं लगा पाए थे । ऐसा दूसरा पिरामिड बनाने की तो बात ही छोड़ दीजिए प्रमाण बताते हैं कि इसका निर्माण करीब 2560 वर्ष ईसा पूर्व मिस्र के शासक बुफु के चौथे बंश ने कराया था । इसे बनने में करीब 23 साल लगे । पिरामिड कैसे बनाए गए होंगे , यह हैरानी का विषय है । इसमें लगे विशाल पत्थर कहां से लाए गए होंगे , कैसे लाए गए होंगे और उन्हें किस तरह एक - दूसरे के ऊपर रखा गया होगा ? यहां आसपास सिर्फ रेत है । ऐसा माना जाता है कि पहले चारों ओर ढालदार चबूतरे बनाए गए होंगे , जिन पर लट्ठों के सहारे पत्थर ऊपर तक ले जाए गए होंगे । पत्थरों की जुड़ाई इतनी साफ है कि नोंक भर भी दोष इसमें नजर नहीं आता । ।

9. रेव पार्टी का क्या अर्थ है ?

➥अंग्रेजी शब्द रेव का अर्थ है मौज मस्ती । टू रेव इसकी क्रिया है यानी मस्ती मनाना । पश्चिमी देशों में यह शब्द बीसवीं सदी में लोकप्रिय हुआ । ब्रिटिश स्लैंग में रेव यानी ‘ वाइल्ड पार्टी ’ । इसमें डिस्क , जॉकी , इलेक्ट्रॉनिक म्यूजिक पर ज्यादा जोर होता है । अमरीका में अस्सी के दशक में एसिड हाउस म्यूजिक का चलन था । रेव पार्टी का अर्थ है मौज मस्ती की पार्टी । इसमें ड्रग्स , तेज पश्चिमी संगीत , नाचना , शोरगुल और सेक्स का कॉकटेल होता है । भारत में रेव पार्टीज मुंबई और दिल्ली से शुरू हुईं । अब ये छोटे शहरों तक भी पहुंच गई हैं , लेकिन नशे के घालमेल ने रेव पार्टी का उसूल बदल दिया है । पहले ऐसी पार्टीज खुलकर होती थीं और अब ये चोरी छिपे होने लगी हैं ।

10. नवविवाहिता द्वारा गृहप्रवेश पर अनाज से भरे कलश को पाद - प्रहार से गिराने का क्या औचित्य है ?

➥धर्म ग्रन्थों के अनुसार , वधू को लक्ष्मी का रूप माना गया है । उसके गृहप्रवेश को लक्ष्मी का प्रवेश माना जाता है । यह प्रवेश शुभ मुहूर्त में होना चाहिए । नववधू पहले अपना दाहिना पैर घर की देहरी पर रखती है और प्रायः अलग - अलग प्रांतों की परंपरा के अनुसार , चावल या अनाज से भरे पात्र को पैर से लुढ़काती है । इससे चावल चारों ओर बिखर जाते हैं । धान समृद्धि का प्रतीक हैं । नववधू का प्रवेश घर में सुख और समृद्धि के प्रवेश से जोड़ा जाता है ।

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