पर्यावरणीय अध्ययन की बहुआयामी प्रकृति( The Multidisciplinary Nature of Environmental Studies)

The Multidisciplinary Nature of Environmental Studies

पर्यावरण जीव जगत का आधार अर्थात् जीवन का स्रोत है ।

✷ मानव सभ्यताओं का विकास पर्यावरण से समाकूलन द्वारा ही सम्भव हो सका है ।

✷ प्राचीनकाल में पर्यावरण सम्बन्धी समस्या नहीं थी क्योंकि प्रकृति से सामन्जस्य था , जनसंख्या की कमी थी और अधिकांशतः मानव की पर्यावरण पर निर्भरता थी ।

✷ पर्यावरण संरक्षण तथा संतुलित विकास के लिए पर्यावरण अध्ययन की आवश्यकता है ।

✷ पर्यावरण का अध्ययन विविध विषयों से होने के कारण इसे विविध - विषयी कहा जाता है । विज्ञान के विविध विषय जैसे - वनस्पति शास्त्र , जन्तु विज्ञान , रसायन शास्त्र एवं भौतिक शास्त्र से सम्बन्ध हैं ।

पारिस्थितिकी - पर्यावरण की अन्तर निर्भरता का द्योतक है तथा जीव विज्ञान पर्यावरण अध्ययन का प्रमुख पक्ष है ।

✷ मृदा विज्ञान एवं पर्यावरण अध्ययन एक दूसरे के पूरक हैं ।

✷ पर्यावरण अध्ययन एक ओर विज्ञान से सम्बन्धित है तो दूसरी ओर सामाजिक विज्ञानों से भी ।

✷ पर्यावरण एवं भूगोल का एक निकट सम्बन्ध है । पर्यावरण भूगोल वर्तमान में एक शाखा के रूप में उभरा है ।

✷ पर्यावरण अध्ययन एक ऐसा विषय है जो विविध आयामी है ।

✷ पर्यावरण वह आवरण है जिसने सम्पूर्ण जीवमण्डल को आवृत कर रखा है ।

✷ पर्यावरण अध्ययन का क्षेत्र पर्याप्त व्यापक है । यह स्थल मण्डल , जल मण्डल , वायुमण्डल तथा जीवमण्डल को समाहित करता है ।

✷ अच्छा पर्यावरण वह है जो प्रदूषण रहित , स्वास्थ्यवर्द्धक , मनोरंजन की सुविधा , शिक्षा की सुविधा आदि हो ।

✷ पर्यावरण जन - जागृति हेतु आजकल अनेक प्रयत्न किये जा रहे हैं , जिनका स्वरूप अन्तर्राष्ट्रीय , राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक है । पर्यावरण की सुरक्षा करना हमारा कर्तव्य है ।

✷ भारत में पर्यावरण अवबोध का एक उत्तम उदाहरण ' चिपको आन्दोलन है ।

Download PDF
137 KB

Post a Comment

0 Comments

Promoted Posts